Transcript of The Colonial Era in India (Part 2) | Class 8 NEW SST NCERT Chapter 4 | By Gautam Lakhani
MOTION 6th 7th & 8th
0:00सो हेलो हाय एवरीवन क्या हालचाल माय नेम0:02इज गौतम लखानी एंड आई वेलकम यू ऑल टू मोशन0:04678 सो भैया जिस घड़ी का आप लोगों को काफी0:07दिन से इंतजार था वो वीडियो आज चैनल के0:09ऊपर आ गया है यानी कि आज के इस क्लास में0:11आज के इस सेशन में आप और मैं मिलकर के0:13क्लास एट्थ जो हमारी नई एनसीईआरटी है उसका0:17जो कॉलोनियल एरा इन इंडिया नाम का चैप्टर0:19है उसका पार्ट टू आज के इस वीडियो में हम0:22करने वाले हैं। प्रीवियस सेशन के अंदर0:24प्रीवियस वीडियो के अंदर हम लोगों ने देखा0:26फ्रेंच के बारे में, डच के बारे में कि0:28किस तरीके से वह लोग इंडिया आए, क्या-क्या0:30चीजें उन्होंने करी। आज के इस वीडियो में,0:32आज के सेशन के अंदर आपके गौतम भैया आपको0:35बताएंगे कि भैया भारत आकर के अंग्रेजों ने0:38क्या कुछ तूफान मचाए। अगर आपको पार्ट वन0:41देखना है तो नीचे डिस्क्रिप्शन के अंदर भी0:43लिंक मिल जाएगा। पिंड कमेंट के अंदर भी0:45लिंक है। साथ ही साथ ऊपर भी यहां पर यह0:47घूमता हुआ दिख रहा होगा। तो फटाफट से जाएं0:49पहले पार्ट वन देखें और चलते हैं पार्ट टू0:51की तरफ। बट उससे पहले अगर अभी तक आप लोगों0:54ने चैनल को सब्सक्राइब नहीं करा है, सो0:55मेक श्योर टू सब्सक्राइब द चैनल। इस0:57वीडियो का लिंक और नोट्स आपको नीचे0:59डिस्क्रिप्शन के अंदर वेबसाइट पर मिल1:01जाएगा। आप जाकर के वहां से नोट्स फ्री ऑफ1:03कॉस्ट डाउनलोड कर सकते हैं। तो चलिए शुरू1:05करते हैं भैया बिना टाइम वेस्ट करे। सो1:07देखिए गाइस जब हम यहां पर बात करते हैं1:09अंग्रेजों की। तो आप सब लोगों को पता है1:12कि भारत के ऊपर अंग्रेजों ने लगभगल लगभग1:16200 इयर्स तक रूल यहां पर करा और इन 2001:19सालों के अंदर जब भारत के ऊपर अंग्रेजों1:22ने रूल करा तो भारत की इकोनमी भारत की1:26सोसाइटी, भारत के कल्चर को तबाह करने की1:29बर्बाद करने की कोशिश करी। तो हम वही सब1:32देखेंगे कि अंग्रेज कैसे भारत आए। क्या1:35इनका शुरुआत में मोटिवेशन था और किस तरीके1:38से ये लोग आगे चलकर के भारत को रूल करने1:41लगते हैं। तो देखिए कहानी की शुरुआत तो1:43इनकी भी एज अ ट्रेडर ही होती है। हम क्या1:46देखते हैं बच्चा कि ये जो अंग्रेज भी जब1:48भारत आए तो इनका शुरुआत में मेन मकसद क्या1:51था? मेन मकसद इनका व्यापार करना ही था।1:54शुरुआत के अंदर ये एक ट्रेडिंग ग्रुप के1:57तौर पर ही इंडिया आए थे। हम देखते हैं कि2:00आगे चलकर के फिर ये खुद को एक इंपीरियल2:03पावर के तौर पर एस्टैब्लिश कर लेते हैं।2:05हम देखते हैं कि जब अंग्रेज भारत आए तो उस2:09टाइम पर जो इंग्लैंड की क्वीन थी उनका नाम2:12था क्वीन एलिजाबेथ वन। ये क्वीन एलिजाबेथ2:16वन से इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी जब भारत2:19के लिए व्यापार करने के लिए आई तो ये वहां2:22से परमिशन लेकर के आई थी कि भैया हम भारत2:25जब व्यापार करने जाएंगे तो हमारी महारानी2:28हमें यह परमिशन दे कि हम अगर भारत के अंदर2:31कुछ दिक्कत परेशानी होती है तो हम वहां पर2:34अपनी आर्मी बना सकें। हम वहां पर शुरुआत2:37में तो एज अ ट्रेडर ही जाएंगे। बट2:40धीरे-धीरे देखतेदेखते हमने क्या देखा कि2:43भैया ये लोग शुरुआत में तो एज अ व्यापारी2:45ही आए एज अ ट्रेडर ही आए बट धीरे-धीरे2:48करके इन लोगों ने खुद को भारत के कल्चर2:52भारत की सोसाइटी के अंदर मिलनाजुलना शुरू2:55कर दिया। ये देखने लगे, समझने लगे कि भैया2:58कहां पर क्या हो रहा है। एग्जांपल के तौर3:00पर अगर हम बात करें तो 17th सेंचुरी में3:02इन्होंने शुरुआत में जो अपनी इंडस्ट्रियल3:05ट्रेडिंग पोस्ट वगैरह खोली यानी कि जहां3:08पर ये व्यापार करते थे वो थे इलाके सूरत3:11के, मद्रास के, बॉम्बे के, कोलकाता के। तो3:14शुरुआत में इन लोगों ने धीरे-धीरे अपनी3:16पकड़ कहां पर बनाई? सूरत के अंदर, मद्रास3:19के अंदर, बॉम्बे के अंदर, कोलकाता के3:21अंदर। हालांकि कभी-कभी वहां के लोकल3:24रूलर्स के साथ इन लोगों को थोड़ा बहुत3:26लड़ना पड़ जाता था। बट हम क्या देखते हैं?3:29हम देखते हैं कि भारत के अंदर शुरुआत से3:32ही जो फॉरेनर्स थे वो व्यापार करने के लिए3:35आते थे। इंडिया शुरुआत से ही व्यापार के3:39लिए, ट्रेड के लिए इंपॉर्टेंट था। तो3:41हमारे राजा महाराजाओं ने इन्हें इतनी3:43ज्यादाेंस नहीं दी। और ये धीरे-धीरे करके3:46भारत के समाज को, भारत की पॉलिटिक्स को,3:49भारत के राजा महाराजाओं को समझने लगे।3:52क्योंकि इनका शुरुआत से ही एक बिगर3:54एस्पिरेशन था कि भैया हम क्या करेंगे? हम3:58भारत के ऊपर रूल करेंगे। हम भारत के अंदर4:01एक पॉलिटिकल पावर के तौर पर खुद को4:03इस्टैब्लिश करेंगे। तो हम क्या देखते हैं4:06बच्चा जी कि शुरुआत में तो यह व्यापार4:08करने ही आए थे, ट्रेड करने ही आए थे। और4:10शुरुआत में जब ये आए थे तो इनके अंदर ही4:13इनके एस्पिरेशंस थे। इनका टारगेट था कि4:16भैया हमें पहले शुरुआत में भारत के4:18सोसाइटी भारत के कल्चर के बारे में जानना4:20है। भारत की पॉलिटिक्स के बारे में जानना4:22है और धीरे-धीरे करके जैसे-जैसे हमें मौके4:24मिलेंगे हमें खुद को भारत के अंदर एज अ4:27पॉलिटिकल पावर एस्टैब्लिश करना है। तो हम4:30यहां पर क्या देखते हैं बच्चा? अब हम यहां4:32पर देखेंगे कि जब ये भारत आए तो भारत के4:35लोकल राजा महाराजाओं के साथ इनके क्या4:37संबंध रहे? किस तरीके से क्या कुछ चीजें4:40यहां पर रही। मैं आपको फिर कह रहा हूं कि4:42अगर आपको ये नोट्स डाउनलोड करने हैं तो4:44नीचे डिस्क्रिप्शन के अंदर वेबसाइट का4:46लिंक गिवेन है। उस वेबसाइट के ऊपर जाकर के4:48आप ये नोट्स फ्री ऑफ कॉस्ट वहां से4:49डाउनलोड कर सकते हैं। साथ ही साथ बच्चा जी4:52वीडियो को लाइक जरूर करिएगा। कमेंट्स के4:54अंदर अपना फीडबैक मुझे जरूर दीजिएगा। आगे4:57चलते हैं। अब बात करते हैं इनकी स्ट्रेटजी4:59की। तो देखिए हमारे भारत के अंदर भारत के5:02लोगों में सबसे बड़ी प्रॉब्लम क्या थी कि5:04हम लोग जैसे आज बटे हुए हैं रिलीजन के नाम5:07पर कास्ट के नाम पर उस टाइम पर भी हम लोग5:10जो है कहीं ना कहीं बटे हुए थे और उसी5:13डिवीजन का फायदा इन अंग्रेजों ने भी उठाया5:15विद देयर स्ट्रेटजी ऑफ डिवाइड एंड रूल।5:18अंग्रेजों ने क्या करा? अंग्रेजों ने5:20डिवाइड एंड रूल की स्ट्रेटजी को यहां पर5:22फॉलो करा। हम यहां पर देखते हैं कि इन5:25लोगों ने नोटिस करा। इन लोगों ने देखा कि5:28भैया भारत के अंदर कौन ऐसे लोग हैं जिनकी5:31आपस में नहीं बनती और इन्होंने धीरे-धीरे5:34करके साइड्स लेने शुरू कर दिए। यानी कि ये5:36क्या करने लगे? ये अपनी डिवाइड एंड रूल की5:39पॉलिसी का इस्तेमाल करने लगे। और इस5:41डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी के अंदर जो भारत5:44के अंदर रूलर्स होते थे, राजा महाराजा5:46होते थे, उनमें जो छोटे-मोटे डिस्प्यूट्स5:48होते थे, लड़ाई झगड़े होते थे, यह वहां पर5:51क्या करते थे? उन टेंशंस का फायदा उठाते5:53थे और खुद को वहां पर अपने आप को ज्यादा5:56एक तरीके से फायदे की सिचुएशन में रखते5:59थे। मान करके चलो एग्जांपल के तौर पर कि6:01भैया टीपू सुल्तान और मराठाज़ के बीच में6:03टेंशन है। तो इन्होंने क्या करा? इन्होंने6:06जाकर के मराठाज़ का हाथ पकड़ लिया कि भैया6:08हम आपकी मदद करेंगे। आप हमारा साथ दीजिए6:10भैया। तो ठीक है जी। अब मान करके चलो कि6:14हैदराबाद का जो निजाम था उसके बीच में और6:16टीपू सुल्तान के बीच में टेंशन है। तो ये6:18वहां पर भी आ गए हैदराबाद के निजाम के पास6:20कि अरे निजाम साहब काहे टेंशन लेते हो? ये6:23टीपू को तो हम संभाल लेंगे। आप बस हमें ये6:25साथ दे देना। आप अगर जीत जाओगे तो आप हमें6:27ये एरिया दे देना व्यापार करने के लिए6:29ट्रेड करने के लिए। तो इस तरीके से जो6:32इंडियन लोकल रूलर्स के बीच में टेंशनंस थी6:34उन टेंशंस का इन्होंने फायदा उठाया और जो6:37रॉयल फैमिलीज के अंदर भी डिस्प्यूट्स होती6:39थी उन रॉयल फैमिलीज के डिस्प्यूट्स का भी6:41इन्होंने फायदा उठाया। जहां इन्होंने देखा6:43कि भैया राजा की अपने चाचा से नहीं बन6:45रही। तो ये चाचा की तरफ चले गए कि अरे6:48चाचा जी तुम तो यार राजा बनने लायक हो और6:51तुम कहां बैठे हो यहां पर साइड में छुप कर6:53के कोने में तुम्हें तो हम राजा बनाएंगे।6:56तो इस तरीके से इन्होंने क्या करा? भारत6:58के अंदर भारत की पॉलिटिक्स के अंदर लोकल7:01राजा महाराजाओं के बीच में जो डिस्प्यूट7:03होती थी उसका फायदा उठाया। उनके परिवारों7:05में जो डिस्प्यूट्स होती थी इन सबका फायदा7:08उठा के खुद कहीं ना कहीं अपने आप को7:10स्ट्रांग भारत के अंदर ये करते चले गए विद7:12देयर पॉलिसी ऑफ डिवाइड एंड रूल। और उसका7:15सबसे पहला एग्जांपल हमें कहां पर देखने को7:17मिलता है? वो देखने को मिलता है हमें7:19बंगाल के अंदर विद बैटल ऑफ प्लासी। नाम7:22याद रखना बैटल ऑफ प्लासी। 1757 में बचा हम7:26क्या देखते हैं कि बंगाल का नवाब हुआ करता7:29था जिसका नाम था नवाब सिराजुद्दौला। अब7:33अंग्रेज चाहते थे कि बंगाल के अंदर उनका7:36रूल एस्टैब्लिश हो। बिकॉज़ बंगाल बहुत7:39ज्यादा प्रोस्परस था। और जब मैं बंगाल की7:42यहां पर बात कर रहा हूं बच्चा तो ये बंगाल7:44क्या है आज का? आज का बिहार ले लो, आज का7:47झारखंड का कुछ हिस्सा ले लो। आज का पूरा7:50वेस्ट बंगाल ले लो, पूरा बांग्लादेश ले7:52लो। तो उस टाइम का बंगाल इतना बड़ा हुआ7:55करता था जिसमें मॉडर्न डे बिहार के कुछ7:58हिस्से झारखंड के कुछ हिस्से पूरा वेस्ट8:01बंगाल पूरा बांग्लादेश यानी कि इतना बड़ा8:04उस टाइम का बंगाल हुआ करता था। तो8:06अंग्रेजों की नजर जो थी वो बंगाल पर थी।8:09क्योंकि बंगाल बहुत ज्यादा प्रोस्परस था।8:11बंगाल ट्रेडिंग के पॉइंट ऑफ व्यू से,8:13व्यापार के पॉइंट ऑफ व्यू से बहुत8:15इंपॉर्टेंट था। एग्रीकल्चर के पॉइंट ऑफ8:17व्यू से बहुत इंपॉर्टेंट था। रेवेन्यू के8:19पॉइंट ऑफ व्यू से बहुत इंपॉर्टेंट था। और8:21आप मान करके चलिए कि जितना अकेले बंगाल का8:24रेवेन्यू होता था उतना पूरे ब्रिटेन का8:26मिलाकर के नहीं होता था। मतलब ब्रिटेन तो8:29बहुत पीछे था बंगाल से रेवेन्यू के मामले8:31में। तो अंग्रेजों की नजर पड़ी कि यार8:33क्यों ना अगर बंगाल हमारे हाथ में आ जाए8:36तो हमारी तो बल्लेबले हो जाएगी भैया। ओ हो8:38हो बल्ले बल्ले। तो अब होता क्या है? हम8:41देखते हैं कि जो नवाब सिराजुद्दौला था वो8:44अंग्रेजों को पसंद नहीं करता था।8:46अंग्रेजों ने दो-तीन बार बंगाल के अंदर8:48ऐसी हरकत कर दी कि नवाब सिराजुद्दौला ने8:51उन्हें पकड़ा और भैया सूत दिया पकड़ के8:53लगा दिए दो कान के नीचे। अब अंग्रेज समझ8:56गए कि भैया हमारा ये जो नवाब है यह दुश्मन8:58है। और अगर हम बंगाल के ऊपर अपनी पकड़ बना9:01करके रखना चाहते हैं तो हमें इस नवाब को9:04साइड लगाना होगा। अब ये नवाब जो है थोड़ा9:07सा इमैच्योर भी था। लड़का था, जवान था,9:10जवान खून एकदम, यह हमारा सिस्टम हिला9:13देंगे हम तो ऐसा वाला लड़का। अब होता क्या9:15है? अब होता यहां पर ये है कि हम देखते9:18हैं कि अंग्रेजों का उस टाइम पर एक9:21बेसिकली आप मान करके चलो कि ब्रिटिश आर्मी9:25के अंदर एक व्यक्ति था जिसका नाम था9:27रॉबर्ट क्लाइव। अब यह रॉबर्ट क्लाइव था तो9:30एक क्लर्क बट यह चाहता था कि यार मैं जो9:33हूं ना कुछ बड़ा कर जाऊं जीवन में। तो हम9:35देखते हैं कि रॉबर्ट क्लाइव जो है यहां पर9:38स्ट्रेटजी ऑफ डिवाइड एंड रूल देता है। ये9:41कहता है कि अगर हमें नवाब सिराजुद्दौला को9:44हराना है तो हम क्या करते हैं? हम इसका जो9:47मिलिट्री कमांडर है, इसकी जो आर्मी का9:49कमांडर है मीर जाफर उसे अपनी तरफ ले लेते9:52हैं। हम देखते हैं कि अंग्रेजों के बीच9:55में और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच9:58में लड़ाई होती है, बैटल होती है जिसका10:00नाम है बैटल ऑफ प्लासी। और इस लड़ाई के10:03अंदर हम क्या देखते हैं? कि एक तरफ तो10:05भैया नवाब साहब तलवार लेकर के हाथी लेकर10:08के खड़े हैं अंग्रेजों के खिलाफ और वहीं10:11छोटी सी अंग्रेजों की एक फौज ने टुकड़ी ने10:14क्या करा? बंगाल के नवाब की बहुत बड़ी फौज10:17को हरा दिया। कैसे? क्योंकि बंगाल की नवाब10:20जो बंगाल का नवाब था, उसकी जो आर्मी थी,10:22उस आर्मी का जो जनरल था, जो कमांडर था मीर10:25जाफर वो अंग्रेजों के साथ था। अब सोचो अब10:29नवाब को तो क्या लग रहा है कि भैया हमारा10:30मिलिट्री कमांडर है। हमारे को यह मदद10:33करेगा। उस मिलिट्री कमांडेंट ने क्या करा10:35हुआ था? नवाब की ही फील्डिंग सेट करी हुई10:37थी कि भैया इसको तो लपेट देंगे आज। क्यों?10:40क्योंकि अंग्रेजों ने क्या कहा? अंग्रेजों10:42ने मीर जाफर को सपना दिखाया कि अरे मीर10:44जाफर यार तू तू तो यार नवाब बनने के लायक10:47आदमी है। और तू क्या मिलिट्री कमांडर बन10:49करके बैठा है। तो हम यहां पर क्या देखते10:51हैं कि जब प्लासी की बात आती है बच्चा तो10:53बैटल ऑफ प्लासी में मीर जाफर को अपने साथ10:56लेकर के अंग्रेजों ने क्या करा? अंग्रेजों10:58ने नवाब सिराजुद्दौला के खिलाफ एक साजिश11:01करी। और हम देखते हैं कि यहां पर नवाब11:03सिराजुद्दौला हार जाता है। मीर जाफर11:06अंग्रेजों के समर्थन से या अंग्रेजों की11:10साइड लेकर के खुद बंगाल का नवाब यहां पर11:13बन जाता है। और इतिहास में हिस्ट्री में11:16मीर जाफर को गद्दार कहा जाता है। ट्रेटर11:19कहा जाता है कि भैया ये तो गद्दार था।11:21क्यों? क्योंकि अगर मीर जाफर यहां पर11:23अंग्रेजों का साथ ना देता तो अंग्रेज भारत11:26के अंदर आप मान करके चलो कि खत्म ही हो11:29जाते लगभग। बट यहां पर मीर जाफर ने खुद11:32क्या करा? मीर जाफर ने खुद यहां पर11:34अंग्रेजों का साथ दिया। बैटल ऑफ प्लासी के11:36अंदर अंग्रेज जीत गए। नवाब और उसकी आर्मी11:39हार गई। मतलब इट वाज़ अ बैटल वेयर आर्मी ऑफ11:42नवाब डिडंट इवन फॉट और नवाब हार गया।11:45क्यों? क्योंकि उसके साथ ही नहीं थे ये11:47लोग। तो कुल मिलाकर के जब यहां पर हम क्या11:50देखते हैं कि फिर मीर जाफर को बंगाल का11:52नवाब बनाया जाता है और अंग्रेज खूब बंगाल11:54को लूटते हैं जिसको आगे चलकर के अभी हम11:56देखेंगे भी। सो देखो पहली जो इनकी11:58स्ट्रेटजी थी वो थी डिवाइड एंड रूल कि12:00भैया भारत के अंदर राजा महाराजाओं को आपस12:02में ही डिवाइड कराओ। आपस में ही इनको12:05दो। आगे चलकर के हम क्या देखते हैं कि फिर12:08इन्होंने अपनी पॉलिसीज के अंदर और चेंज12:10करने शुरू करे। जैसे-जैसे अंग्रेज भारत के12:13अंदर मजबूत होते चले गए। इन्होंने अपने12:15कंट्रोल को एक्सपेंड करने के लिए अपनी12:16पॉलिसीज के अंदर और चेंजेस किए। अब हम12:19यहां पर क्या देखते हैं कि अंग्रेज एक चीज12:20समझ गए कि यार हमें जो है ना क्या करना12:23है? किंग मेकर बनना है क्योंकि भारत के12:25अंदर क्या दिक्कत थी? भारत के अंदर यह जो12:28नेतागिरी का शौक है ना आप जो देखते हो12:30आजकल भी आपके मोहल्ले में भी कुछ नेताजी12:33होंगे जो अपने आप को नेता समझते होंगे जो12:35YouTube के ऊपर या Facebook के ऊपर12:37Instagram के ऊपर हर दूसरे तीसरे दिन फोटो12:40डालते रहते होंगे कि आज मंत्री जी से12:42मुलाकात करी। आज विधायक जी के घर गए उनके12:44पैर छुए उनका आशीर्वाद मिला। देखे हैं12:46तुम्हारे मोहल्ले में भी हैं कुछ ऐसे12:48नेता। तो इसी तरीके से भारत के अंदर12:51नेतागिरी का शौक शुरू से लोगों को था और12:53राजा महाराजाओं के पैलेसेस के अंदर12:55कोर्ट्स के अंदर यानी कि उनके राज दरबार12:57के अंदर हमेशा ऐसे लोग होते थे जो राजा से13:00नफरत करते थे और समझते थे यार मैं राजा13:02बनूंगा यार ये तो बेकार बना हुआ है राजा13:05तो अंग्रेजों ने ऐसे ही लोगों को टारगेट13:07करना शुरू करा अंग्रेजों ने कहा कि यार13:09व्हाई व्हाई वी शुड गो एंड फाइट विद द13:12किंग डायरेक्टली हम काहे जाएं हम क्यों13:14राजा से जाकर के लड़ाई लड़े जब यहां राजा13:16के पास अपने उसके दुश्मन बैठे हैं अपने घर13:18के लोग उसके साथ बैठे हैं उसके दुश्मन के13:21तौर पर। तो हम यहां पर क्या देखते हैं कि13:23धीरे-धीरे करके अंग्रेज समझ गए कि हमें13:25ऐसे कुछ नमूनों को पकड़ना है जो अपने13:27राजाओं से खुश नहीं है और उनको हमें13:29सपोर्ट करना है और उनके सपोर्ट से हम क्या13:32कर सकते हैं? पावर में आ सकते हैं। हम13:33किंग मेकर बन सकते हैं। व्हाई टू मेक अ13:36किंग? जब हम किंग मेकर बन सकते हैं। तो13:38सिंपल सी बात है ना भाई। तो यहां पर हम13:40क्या देखते हैं? यहां पर हम देखते हैं कि13:42आगे चलकर के अंग्रेज एक पॉलिसी लेकर के13:44आते हैं जिसका नाम था डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स।13:46अब ये डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स क्या कहता था?13:48ये डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स कहता था कि अगर13:51किसी भारत के राजा का अपना13:56रियल सन हायर नहीं होता यानी कि अगर उसका14:00अपना कोई बेटा नहीं पैदा होता तो वो किसी14:04को अपने आर के तौर पर कि भैया मेरा आगे का14:07वंशज कौन होगा? उसके तौर पर किसी बच्चे को14:10अडॉप्ट नहीं कर सकता। पहले हमारे राजा14:13महाराजा क्या करते थे कि मान करके चलो कि14:15अगर उनका बेटा नहीं हुआ है ना भाई इट इज14:18एन बायोलॉजिकल प्रोसेस नहीं हुआ बेटे का14:20जन्म बेटी हो गई या बच्चा हुआ ही नहीं14:22क्योंकि राजा जी ने बहुत लेट शादी करी थी14:25एक्स व जी कुछ भी रीज़न हो सकते हैं तो ये14:27क्या करते थे अपने किसी रिश्तेदार का अपने14:29किसी सगे संबंधी के लड़के को गोद ले लेते14:32थे अडॉप्ट कर लेते थे तो डॉक्ट्रिन ऑफ14:34लैप्स यहां क्या कहता था डॉक्ट्रिन ऑफ14:36लैप्स यहां पर कहता था कि अगर राजा जी14:39बिना किसी नेचुरल मेल आयर के डेथ हो जाएगी14:43उनकी। यानी कि अगर राजा की डेथ हो जाती14:45है, उसका अपना कोई आगे सक्सेसर नहीं होता14:47नेचुरल जो उसका अपना बेटा था। तो जो14:49अडॉप्टेड वाले हैं ना वो अडॉप्टेड वालों14:51को हम जो है ना रिकॉग्नाइज नहीं करेंगे।14:54हम अडॉप्टेड वालों को मानेंगे नहीं। तो हम14:57यहां पर क्या देखते हैं? हम यहां पर यह14:59देखते हैं कि जब बात आती है झांसी की तो15:01झांसी में यही हुआ। झांसी के अंदर क्या15:03हुआ बच्चा? यही चीज हुई कि उस टाइम पर15:05झांसी के जो महाराज थे उनकी डेथ हो जाती15:08है और रानी लक्ष्मीबाई जो थी उनके जो बेटे15:10थे वो अडॉप्टेड थे। तो अंग्रेज यहां पर उन15:14अडॉप्टेड सन को उनके लीगल आयर के तौर पर15:17उनके सक्सेसर के तौर पर मानने से मना कर15:19देते हैं। तो हम देखते हैं कि फिर आगे15:21चलकर के जब 1857 का रिवोल्ट हुआ तो झांसी15:24की रानी उसीलिए लड़ी वहां पर कि भैया काहे15:26से नहीं मानोगे तुम? आओ तुम्हें बताते हैं15:28अभी। तो इस तरीके से डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स15:31की पॉलिसी क्या कहती थी? डॉक्टिन ऑफ लैब्स15:33की पॉलिसी कहती थी कि अगर कोई नेचुरल मेल15:35आयर नहीं है, कोई नेचुरल मेल सक्सेसर नहीं15:38है, तो अडॉप्शन नहीं चलेगा यहां पर। साथ15:40ही साथ हम यहां पर क्या देखते हैं कि ये15:42एक और पॉलिसी लेकर के आए जिसका नाम था15:44सब्सिडरी अलायंस। अब ये पॉलिसी और खतरनाक15:47थी। अंग्रेजों ने कहा यार एक बात बताओ।15:51अगर हम अपने ही बंदों को अपने ही लोगों को15:54राजा के दरबार में राजा की कोर्ट में खड़ा15:57कर दें तो मजा आ जाएगा यार। वो हमें सारी15:59खबर देते रहेंगे कि राजा के यहां क्या हो16:01रहा है, क्या नहीं हो रहा, कौन राजा के16:03खिलाफ है, कौन नहीं है। तो उस पॉलिसी का16:05नाम दिया गया सब्सिडरी अलायंस। अब ये16:07सब्सिडरी अलायंस की पॉलिसी क्या कहती थी?16:09ये राजा को कहती थी कि देख भाई राजा तुझे16:12आर्मी नहीं रखनी। तुझे यहां पर क्या है?16:14आर्मी नहीं रखनी। हम अंग्रेज जो हैं ना हम16:17तुम्हारे लिए हैं। हम तुम्हारे बॉडीगार्ड16:19हैं यार। हम तुम्हारे लिए लड़ेंगे।16:21तुम्हें क्या करना है? तुम्हें हमारे साथ16:23सब्सिडरी अलायंस साइन करना है। जिसमें16:25तुम्हारी आर्मी नहीं होगी। ब्रिटिश आर्मी16:27होगी। जिसके लिए तुम्हें क्या देना होगा?16:29पैसा देना होगा। अब ये ब्रिटिश आर्मी16:31तुम्हें प्रोटेक्ट करेगी, तुम्हारे लिए16:33लड़ेगी, तुम्हारे लिए सारे काम करेगी। और16:35इस ब्रिटिश आर्मी को मैनेज करने के लिए,16:37एडमिनिस्ट्रेशन के अंदर डे टू डे चीजों16:40में तुम्हारी हेल्प करने के लिए हमारा एक16:42बंदा तुम्हारे साथ रहेगा। अब यहां पर क्या16:45होता है कि हमारे कई राजा महाराजा क्या16:48करते हैं? इस सब्सिडरी अलायंस को साइन कर16:51लेते हैं। जिसमें हैदराबाद जो है सबसे16:53पहला स्टेट या हैदराबाद जो है सबसे पहला16:56यहां पर बनता है जो क्या करता है?16:58सब्सिडरी अलायंस को साइन करता है 1798 के17:01अंदर। हम यहां पर क्या देखते हैं बच्चा?17:03हम यहां पर देखते हैं कि एक तरीके से इस17:06सब्सिडरी अलायंस ने क्या करा? हमारे17:08इंडियन राजा महाराजाओं को अंग्रेजों के17:11घुटनों पर ला के रख दिया। हमारे इंडियन17:14राजा महाराजा जो हैं एक तरीके से17:16अंग्रेजों के आगे झुक गए ना भाई। आप खुद17:18सोचो वो राजा ही क्या जिसके पास अपनी17:20आर्मी ना हो। भैया राजा कौन है जिसके पास17:22अपनी आर्मी है कि अगर राजा के खिलाफ कोई17:25बोलेगा तो राजा कहेगा कि मंत्री जी उड़ा17:27दो इसका गला। अब यहां पर आर्मी ही अपनी17:30नहीं है। तो राजा किस बात का भाई? राजा के17:33पास पावर किस बात की रही? अब यहां पर क्या17:35होता था कि यहां पर हम देखते हैं कि राजा17:37एक तरीके से अंग्रेजों का गुलाम बन गया।17:40ही कुड नॉट इवन एस्केप इफ ही वांट्स टू।17:42अगर वो अंग्रेजों से बचना भी चाहता है तो17:44वो बच ही नहीं सकता। क्यों? क्योंकि उसके17:45पास अपनी आर्मी नहीं है। तो हम यहां पर17:48क्या देखते हैं कि सब्सिडरी अलायंस ने दो17:50काम करे। एक तो इंडियन राजा महाराजाओं को17:53कमजोर कर दिया। दूसरा अंग्रेजों को17:55मिलिट्री वाइज पावरफुल कर दिया। ताकतवर17:57बना दिया यहां पर। हैदराबाद के केस में18:00हमने देखा कि भैया यहां पर नवाब के पास18:02अपनी आर्मी ही नहीं है। आगे चलकर के हम18:05क्या देखते हैं? आगे चलकर के हम देखते हैं18:08कि भले ही अंग्रेजों ने इन एरियाज के ऊपर18:11अपना कंट्रोल बनाया। कंट्रोल इस्टैब्लिश18:14करा डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स की पॉलिसी ला के।18:17कमेंट्स में मुझे बताना कि डॉक्ट्रिन ऑफ18:19लैप्स की पॉलिसी कौन लेकर के आया था और18:21सब्सिडरी अलायंस की पॉलिसी ला के18:23अंग्रेजों ने भारत के अंदर अपना जो रूल है18:26उसको एक्सपेंड करने की कोशिश करी। इन18:28दोनों पॉलिसीज को कौन लाया था इंडिया में?18:30कमेंट्स में मुझे बताना। हालांकि इन18:32स्लाइड्स के अंदर ऑलरेडी लिखा हुआ था वो18:34कहीं पर। ठीक है? आप ये नोट्स फ्री ऑफ18:36कॉस्ट डाउनलोड कर सकते हो। नीचे18:38डिस्क्रिप्शन के अंदर लिंक है वहां से18:40जाकर के। ठीक है? साथ-साथ वीडियो को लाइक18:42भी करते जाओ। मैं देखता हूं कि तुम लाइक18:43नहीं करते हो भाई। व्यूज आ रखे होते हैं18:4550000 60000 70000 और लाइक होते हैं 1000,18:482000, 3000। मजा नहीं आता भाई। लाइक करा18:51करो वीडियो को अच्छे से। कमेंट्स में अपना18:53फीडबैक दिया करो अच्छे से। ठीक है? अब18:55देखिए होता क्या है? होता यहां पर ये है18:57कि चलो समझ आता है कि अंग्रेजों ने भारत18:59के अंदर अपना रूल एस्टैब्लिश कर लिया।19:01भारत के अंदर अब वो रूल करने लगे। बट सही19:05से रूल करो ना भैया। हम क्या देखते हैं कि19:08हम देखते हैं कि अंग्रेजों ने जब भारत के19:10अंदर रूल करना शुरू करा अगर हम बंगाल की19:12ही बात करें तो प्लासी जीतने के बाद जो19:16इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी थी वो क्या19:18करती है वो यहां पर रेवेन्यू कलेक्शन की19:20पावर्स अपने हाथ में ले लेती है। यानी कि19:23अब क्या है कि अब बंगाल, बिहार, उड़ीसा इन19:26एरियाज के अंदर जो इंडिया के सबसे अमीर19:28एरियाज थे, रिच रीजंस थे, वहां पर19:31अंग्रेजों के पास ये पावर आ जाती है कि अब19:33वो क्या कर सकते हैं? वहां से रेवेन्यू19:35कलेक्ट कर सकते हैं। यानी कि सोचो क्या19:37हुआ? मीर जाफर ने बंगाल की तिजोरी की चाबी19:41किसके हाथ में दे दी? अंग्रेजों के हाथ19:43में दे दी। कि लीजिए जनाब आपने हमें यहां19:46का क्या बनाया था? आपने हमें यहां का नवाब19:49बनाया था। अब जो भी हमारा रेवेन्यू19:51कलेक्शन होगा हमारे लोगों से जो भी टैक्स19:53कलेक्ट होगा वो आप करके लाना। अब बताओ।19:56अबे अब तेरे पास जब पैसा ही नहीं रहेगा तो19:58क्या करेगा? तो अंग्रेजों ने क्या करा?20:00अंग्रेजों को तो भैया लूटना था भारत। तो20:02इन्होंने क्या करना शुरू करा? भारत की20:03जनता से, भारत के लोगों से हाई टैक्सेस20:06चार्ज करने यहां पर शुरू कर दिए। और हाई20:08टैक्सेस तो लेते ही थे। अब बदले में जो20:10अंग्रेजों को थोड़ी बहुत रिस्पांसिबिलिटीज20:13दी गई एडमिनिस्ट्रेशन की, डेवलपमेंट की20:15इन्होंने कुछ काम नहीं करा। यानी कि बस20:17लोगों से लूट रहे थे और कुछ डेवलपमेंट के20:20लिए एडमिनिस्ट्रेशन के लिए कुछ20:21इन्वेस्टमेंट नहीं कर रहे थे। हम देखते20:23हैं कि 1770 और 1772 के बीच में बंगाल के20:27अंदर फेमाइन आती है। सूखा पड़ता है। फूड20:30शॉर्टेज हो जाती है। बट अंग्रेज क्या कर20:32रहे थे? अंग्रेज जो है अब भी हमारे20:34किसानों से बहुत ज्यादा टैक्स चार्ज कर20:37रहे थे। हमारे लोगों से बहुत ज्यादा पैसा20:40ले रहे थे। और हम देखते हैं कि इस 177220:44की फेमाइन में इन 2 साल के अंदर भारत के20:47बंगाल रीजन से 1 करोड़ लोगों की डेथ हो20:51गई। ड्यू टू फूड शॉर्टेज और उन्हें खाना20:54नहीं मिल पाया। इस वजह से राजा का क्या20:57कर्तव्य होता है? राजा का यह धर्म होता है21:00कि अगर वो जनता से टैक्स कलेक्ट कर रहा है21:03तो उसको उस पैसे का इस्तेमाल जनता के21:05डेवलपमेंट के लिए करना है। जनता को अगर21:08कभी कोई प्रॉब्लम आती है तो राजा को खर्चा21:11करना पड़ेगा। उसको प्रोटेक्ट करना पड़ेगा।21:13बट यहां क्या था? यहां अंग्रेज सिर्फ लूट21:15रहे थे। जब खर्चे की बात आती थी तो वहां21:17गायब हो जाते थे। पीछे हो जाते थे भैया।21:20तो हम यहां पर क्या देखते हैं बच्चा जी कि21:22इस बंगाल फेमाइन ने लोगों को भारत के अंदर21:26अंग्रेजों का असली चेहरा यहां पर दिखाया21:28कि अंग्रेज कितने ज्यादा क्रूल है। आगे21:31चलकर के हम देखते हैं कि अंग्रेजों ने21:34फेमाइन के दौरान भी यहां पर हमारे किसानों21:38से जबरदस्ती टैक्स वगैरह चार्ज करे।21:40जबरदस्ती हमारे किसानों से यहां पर पैसा21:43लिया। अगर हम यहां पर अंग्रेजों की ही बात21:45करें तो एक ब्रिटिश ऑफिशियल हुए जिनका नाम21:47था डब्ल्यूडब्ल्यू हंटर। डब्ल्यूडब्ल्यू21:50हंटर वो क्या कहते हैं? पीपल ईटिंग लीव्स21:53एंड सेलिंग देयर चिल्ड्रन ड्यू टू21:55स्टार्वेशन। कि लोगों के पास पैसा इतना भी21:58नहीं था कि वो कुछ खरीद पाएं, कुछ खा22:00पाएं। वो क्या करते थे? पेड़-पौधों के22:03पत्तों को खाते थे। लीव्स को खाते थे।22:05अपने बच्चों को बेच देते थे भूख की वजह से22:08कि चलो हमें इनसे यहां पर कुछ मिल जाएगा।22:10तो आप सोच रहे हो कि कितनी ज्यादा हारश22:13कंडीशंस यहां पर हमें देखने को मिलती हैं।22:16जबरदस्ती हमारे जो फार्मर्स थे वो अपनी22:18कैटल, अपने टूल्स, अपनी सीड ग्रेंस तक22:20बेचने पर मजबूर हो गए। और जब बहुत ही हद22:22पार हो जाती थी तो उन्हें अपने बच्चों को22:24भी बेचना पड़ता था। क्यों? क्योंकि एक तरफ22:27तो क्रॉप फेल होने से, फसल बर्बाद होने से22:30उनके पास कुछ पैसा नहीं है। दूसरा अंग्रेज22:33उनसे टैक्स मांग रहे हैं। लैंड टैक्स ले22:35रहे हैं। भाई कायदे में क्या बनता है कि22:37ठीक है आप एक किसान हो। आपकी लैंड पर किसी22:41साल फेमाइन आ गई या क्रॉप फेल हो गई, कुछ22:44दिक्कत परेशानी हो गई तो सरकार क्या22:46करेगी? वहां टैक्स माफ कर देगी। चलो कोई22:48बात नहीं जब तुम्हारे पास पैसा ही नहीं है22:50तो टैक्स कहां से दोगे? बट अंग्रेजों ने22:52कहा कि भैया कोई माफी नहीं है। पैसा दो22:54हमको दो। तो लोगों को क्या करना पड़ा?22:57हमारे किसानों को क्या करना पड़ा? अपने22:58बच्चों तक को भी बेचना पड़ा। और हम यहां23:02पर देखते हैं कि भैया लीव्स खानी पड़ी,23:05ग्रास खानी पड़ी। ये सारी चीजें लोगों को23:07करनी पड़ी। और कहीं ना कहीं हम क्या देखते23:09हैं कि शहरों के अंदर भी लोग तो भूख से23:13बीमारियों से मर गए। आप समझ पा रहे हो, आप23:15इमेजिन कर पा रहे हो कि कितना ज्यादा23:18अत्याचार भारत के लोगों पर अंग्रेजों ने23:20करा। कितनी बुरी तरीके से भारत के लोगों23:23को अंग्रेजों ने यहां पर ट्रीट करा। तो ये23:25सारी चैलेंजेस ये सारे प्रॉब्लम्स जो है23:28बच्चा जी हमें यहां पर देखने को मिलते23:29हैं। आगे चलकर के हम क्या देखते हैं? आगे23:32चलकर के हम देखते हैं कि इसी तरीके का23:34फेमाइन एक और बार 1876 1878 के दौरान भी23:38आया। उस टाइम पर लगभगल लगभग 80 लाख लोग 823:41मिलियन पीपल भारत के डेक्कन यानी कि साउथ23:44इंडिया वाले इलाके में मारे गए। हम यहां23:47पर देखते हैं कि भैया उस टाइम पर अंग्रेज23:49क्या कर रहे थे? अंग्रेज जो हैं बस 123:52मिलियन टन यानी कि लगभगल लगभग 10 लाख टन23:55चावल हर साल बाहर भेज रहे थे। ब्रिटेन दे23:59रहे थे। तो आप सोच रहे हो कि भारत में अगर24:02कहीं पर आज क्या होता है? आज की डेट में24:05अगर भारत में किसी एरिया के अंदर फूड24:07शॉर्टेज हो जाती है, फसल बर्बाद हो जाती24:10है, बारिश के आने से, सूखा पड़ने से, किसी24:12भी रीज़न से तो गवर्नमेंट क्या मेक श्योर24:14करती है? गवर्नमेंट मेक श्योर करती है कि24:15ठीक है इस एरिया में लोग भूख से ना मरे।24:17तो गवर्नमेंट बाकी एरियाज से थोड़ा बहुत24:19जो है अनाज वगैरह लेकर के उन लोगों को24:21अवेलेबल करा देती है। अंग्रेज क्या कर रहे24:24थे? अंग्रेजों ने क्या करा? अंग्रेज जो24:26हैं देख रहे हैं कि डेक्कन के अंदर कहां24:28पर? साउथ इंडिया के अंदर फेमाइन आया हुआ24:30है। लोग भूख से मर रहे हैं। बट ये क्या कर24:32रहे थे? जो चावल भारत के अंदर थोड़ा बहुत24:35हो भी रहा था जिन एरियाज से उस चावल को24:37ब्रिटेन भेज रहे थे।24:38तो यहां पर हम क्या देखते हैं बच्चा जी?24:41कि भारत के कॉस्ट पर भारत के लोगों की24:44कॉस्ट पर ब्रिटेन की जरूरतों को पूरा करा24:46जा रहा है। यस और नो। भारत की कॉस्ट पर24:49भारत के लोगों की जान की परवाह किए बिना24:52ब्रिटेन का ध्यान रखा जा रहा है। तो आप24:54समझ सकते हो। आप इमेजिन कर सकते हो कि24:56कितनी ज्यादा गद्दारी कितना ज्यादा गलत हम24:58लोगों के साथ किया जा रहा था। साथ ही साथ25:01हम यहां पर क्या देख रहे हैं कि फोटो है25:02आपके सामने। देखो फोटो को ध्यान से देखो25:04कि ग्रेन बैग्स ऑन मद्रास बीच रेडी फॉर25:07एक्सपोर्ट व्हाइल पीपल वर डाइंग ऑफ हंगर।25:10आप देख पा रहे हो कितने सारे यहां पर जो25:13ग्रेन बैग्स हैं राइस के वीट के वो यहां25:15पर मद्रास के अंदर पड़े हुए हैं। और इसी25:17समय पर मद्रास के अंदर लोग फेमाइन से मर25:20रहे हैं। और ये बैग्स कहां जाने के लिए25:22रखे हुए ब्रिटेन जाने के लिए कि नहीं भैया25:24हमारे ब्रिटेन में जो लोग बैठे हैं ना25:25भैया बिरयानी बना करके खाएंगे तो आप सोच25:28रहे हो इमेजिन कर पा रहे हो कि कितना बुरा25:31यहां पर हो रहा था भारत के लोगों के साथ25:33आप खुद सोचो कि आपने एक रोटी बनाई ठीक है25:37इमेजिन करो आपने एक रोटी बनाई अब आपको वो25:39रोटी खाने की जरूरत हैI अब क्या हुआ आपने25:42कहा कि चलो यार दो रोटी मेरे पास होनी25:44चाहिए| अब आप दूसरी रोटी जब बनाने लगे तो25:46आपके हाथ से आटा गिर गया या खराब हो गया|25:48अब आपके पास एक ही रोटी है पर आपको क्या25:50कहा जा रहा है कि तू यह रोटी नहीं खाएगा|25:52भाई यह रोटी तो मैं तेरे पड़ोसी को दे25:54दूंगा। तो आपको बुरा लगेगा या नहीं लगेगा?25:56बताओ। तो अंग्रेजों ने ऐसा ही करा कि भारत25:59के लोगों ने जो अनाज ग्रो करा वो भारत के26:02लोगों के लिए यूज़ नहीं हो रहा। उसे26:03ब्रिटेन बेचा जा रहा है। उसे कहां बेचा जा26:05रहा है? ब्रिटेन जाकर के बेचा जा रहा है।26:06और भारत के अंदर क्या है? लोग मर रहे हैं।26:0980 लाख लोग 1876 78 के अंदर मारे गए। उससे26:14पहले 1 करोड़ लोग बंगाल के अंदर मारे गए।26:16बट अंग्रेजों को कोई फर्क नहीं पड़ता।26:18अंग्रेजों को कोई फर्क यहां पर नहीं26:21पड़ता। साथ ही साथ इस टाइम पर क्या हो रहा26:23था? अंग्रेजों ने क्या करा? फ्री मार्केट26:25पॉलिसी करी। अंग्रेजों ने कहा कि भैया26:27देखो ऐसा है26:29जब फेमाइन आएगी यानी कि फूड शॉर्टेज जब26:32होगी तो ऑब्वियस सी बात है चीजों के26:34प्राइसेस बढ़ जाएंगे। भाई जाहिर सी बात है26:36ना अगर आपको ध्यान अगर हो जब पीछे कोरोना26:39वायरस आया था तो कोरोना वायरस के टाइम पर26:42क्या हुआ कि जो सैनिटाइजर होते थे जिन्हें26:44पहले कोई पूछता भी नहीं था वो ₹100 के हो26:47गए। छोटी-छोटी शीशियां क्योंकि उनकी26:48डिमांड बढ़ गई थी। यही तो हुआ। अब आजकल26:51फिर वही है ₹200 के बिक रहे हैं सैनिटाइजर26:53बट उस टाइम पर सैनिटाइजर कितने महंगे हो26:55गए थे तो गवर्नमेंट ने वहां पर इन्वॉल्व26:57करा था ना गवर्नमेंट ने वहां पर थोड़ा सा26:59पैसों को रेगुलेट करा गवर्नमेंट ने कहा कि27:01अगर कोई चीज महंगी बेचेगा तो वो पनिश करा27:03जाएगा बट अंग्रेजों ने यहां पर क्या कहा27:05अंग्रेजों ने कहा कि देखो हमारे यहां तो27:06फ्री मार्केट पॉलिसी है भाई भारत के अंदर27:09भले ही अगर फेमाइन आए चाहे कुछ आए उस टाइम27:11पर इंडिया का जो वॉइस था वो था लिटन27:14वॉइसरॉय ने क्या कहा वॉइस ने कहा कि भैया27:16देखो ऐसा है हम फूड प्राइसेस को कंट्रोल27:18करने के लिए कुछ नहीं करेंगे तो हम क्या27:20देखते हैं? हम देखते हैं कि जब 1878 में27:23ढक्कन के अंदर फेमाइन आया हुआ था। उस टाइम27:26पर फूड प्राइसेस भारत के अंदर इतने महंगे27:29हो गए, इतने ज्यादा कॉस्टली हो गए कि आम27:31जनता अफोर्ड नहीं कर पा रही। ज्यादातर27:33अनाज को कहां भेजा जा रहा है? ब्रिटेन27:36भेजा जा रहा है। और खुद हमारा जो अंग्रेज27:38एडमिनिस्ट्रेशन था, जो वायसराय था, वो27:40क्या कर रहा है? वो दिल्ली में 68,00027:43लोगों को पार्टी दे रहा है। तो, आप सोच27:46रहे हो? एक तरफ तो भारत के अंदर लोग मर27:49रहे हैं। दूसरी तरफ फूड प्राइसेस महंगे हो27:52रहे हैं। सरकार उनको महंगाई को कंट्रोल27:54करने के लिए कुछ नहीं कर रही। सरकार क्या27:56कर रही है? 68,000 लोगों को पार्टी दे रही27:58है। यह हाल था। आप इमेजिन करिए कि28:02अंग्रेजों के समय पर अंग्रेजों ने भारत के28:05अंदर जो लगभग लगभग 200 साल रूल करा। 15028:08से 200 साल जो रूल करा इस बीच 1757 से28:11लेकर के 1947 तक भारत के अंदर लगभग लगभग28:1512 छोटे और 20 बड़े फेमाइंस आए। यानी कि28:1912 से लेकर के 20 फेमाइंस हमें यहां पर28:21आते हुए देखने को मिले। और इनके अंदर हम28:24क्या देखते हैं कि लगभगल लगभग 5 करोड़ से28:27लेकर के 10 करोड़ लोग मारे गए। और अगर आप28:31इसको वर्ल्ड वॉर टू या वर्ल्ड वॉर वन से28:33कंपेयर करो तो यह नंबर कई गुना ज्यादा है।28:36बट कोई इसके बारे में बात नहीं करता।28:38नोबडी टॉक्स अबाउट दिस नॉनसेंस जो28:41अंग्रेजों ने भारत के अंदर करी। आप इमेजिन28:44कर पा रहे हो। एक तरफ तो ये भारत को लूट28:46रहे थे। भारत के लोगों के ऊपर अत्याचार कर28:48रहे थे। दूसरी तरफ भारत के अंदर लोग मर28:51रहे थे। इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।28:53इन्हें कोई फर्क नहीं यहां पर पड़ता। तो28:55ये सारे चैलेंजेस, ये सारे प्रॉब्लम्स बचा28:57अंग्रेजों के समय पर। भारत के अंदर हमें28:59आते हुए देखने को मिले। अंग्रेजों ने29:02थोड़ा बहुत नौटंकी करी कि भैया हम तो29:04लोगों के लिए क्या कर रहे हैं? बचाने के29:06लिए रिलीफ कैंप्स वगैरह लगा रहे हैं। ये29:08सब काम कर रहे हैं। बट ये कुछ नहीं होता29:10था यहां पर। हम देखते हैं कि 1878 1880 के29:14अंदर जो फेमाइन आया उस फेमाइन को लेकर के29:17यहां पर जो है बोला गया कि नहीं भैया हमने29:19तो जो है बहुत अच्छे तरीके से चीजें करी29:21हैं। भारत के अंदर फेमाइन को कंट्रोल करने29:24के लिए काम करा है। बट यहां पर हम क्या29:26देखते हैं कि कुछ भी चीज हमें यहां पर29:27होती हुई नहीं देखने को मिलती। अंग्रेजों29:30के समय पर जो भी फेमाइंस वगैरह आए जो भी29:33भारत के अंदर फूड शॉर्टेज वगैरह हुई उसने29:36भारत को गरीबी की तरफ भारत के लोगों को29:40मौत की तरफ ही धकेला। तो आप इमेजिन कर पा29:42रहे हो। कैन यू इमेजिन दिस कि व्हाटएवर29:45फेमाइंस हैपेंड इन इंडिया ड्यूरिंग द29:46ब्रिटिश पीरियड ऑल मेड द पीपल ऑफ इंडिया29:51टू गो सफर द पॉवर्टी एंड लीड्स टू द29:55स्टार्वेशन एंड डेथ। कि भैया लोग भूख से29:59मर गए बट अंग्रेजों ने यहां पर कोई काम30:01यहां पर ढंग से नहीं करा। उन्होंने किसी30:04तरीके का कोई मतलब उन लोगों को हेल्प करने30:07के लिए कोई सही तरीके से पॉलिसीज नहीं30:09बनाई। कोई सही तरीके से काम नहीं करा। बस30:12भारत को लूटा और लूटने पर ही उनका ध्यान30:15यहां पर मेजरली रहा। आप एग्जांपल के तौर30:17पर ये फोटो देखिए। आप देख सकते हैं कि30:19डेक्कन के अंदर खासतौर पर बेंगलोर के30:21आसपास वाले एरियाज में कैसे लोग यहां पर30:24खाने का इंतजार कर रहे हैं। देख रहे हो30:26कितने कमजोर लोग हैं इन बेचारों के पास30:28पहनने को शरीर पर कपड़ा भी नहीं है और30:30इनकी हालत कितनी ज्यादा खराब है। तो ये30:32सारी प्रॉब्लम्स ये सारे चैलेंजेस हमें30:34दिखाते हैं बताते हैं कि कैसे अंग्रेजों30:37ने भारत को लूटा बर्बाद किया और आज ये30:40अंग्रेज हमें लेक्चर देते हैं कि यू30:41इंडियंस यू लिव इन अ डर्ट यू लिव इन अदर्स30:44यू लिव इन अ दैट। मन करता है कान के नीचे30:46चार चांटे मारूं और बहरा कर दूं मार मार30:48के कि अबे जो भारत की आज सिचुएशन है उसके30:52लिए तुम जिम्मेदार हो। वरना भारत तो क्या30:54था? सोने की चिड़िया था। इंडिया वाज़ अ30:56गोल्डन स्परो जिसको तुम लोगों ने आकर के30:59लूटा और इतना लूटा इतना लूटा कि भारत को31:02बर्बाद करके रख दिया। और यह डाटा बताता है31:05उसके बारे में। अब आप सोचो कि यह डाटा जो31:08है बुक्स के अंदर जो इतना लिखा है कि भैया31:10अंग्रेजों के समय पर 5 करोड़ से 10 करोड़31:13लोग मारे गए फेमाइन की वजह से रियलिटी में31:16नंबर कितना बड़ा होगा क्योंकि गवर्नमेंट31:18कभी भी रियल डाटा हमें नहीं बताती तो ये31:21सारे चैलेंजेस ये सारे प्रॉब्लम्स हमें31:23बच्चा जी यहां पर होते हुए देखने को मिलते31:25हैं और कर क्या रहे थे ये ये सिर्फ और31:27सिर्फ कुछ नहीं भारत के अंदर लूट रहे थे31:30ड्रेन ऑफ वेल्थ भारत के अंदर ये क्या कर31:33रहे थे ये भारत के अंदर जो भी भारत के31:35रिसोर्सेज थे उनको लूटने का काम कर रहे31:38थे। कैसे क्या अब उसके बारे में हम यहां31:41पर बात करेंगे। अगर अभी तक आप लोगों ने इस31:44चैप्टर का पार्ट वन नहीं देखा है तो प्लीज31:46जाकर के देखिए। नीचे पिंड कमेंट के अंदर31:49आपको पार्ट वन का लिंक देखने को मिल31:50जाएगा। बाकी साथ ही साथ डिस्क्रिप्शन के31:52अंदर प्लेलिस्ट का लिंक भी है जहां से आप31:55जाकर के ये सारे के सारे लेक्चर्स देख31:57सकते हो इस पूरी एनसीआरटी के और बाकी ये31:59जो तुम बच्चे लगातार मुझे Instagram के32:01ऊपर मैसेजेस भेजते रहते हो कि भैया इस32:04चैप्टर के ऊपर वीडियो डाल दो उस चैप्टर के32:06ऊपर वीडियो डाल दो थैंक यू सो मच आई विल32:08रियली लव योर एप्रिसिएशन बाकी हां किसी भी32:10बच्चे को अगर मेरे से बात करनी हो कुछ32:12अपना डाउट पूछना हो कुछ भी है आप मुझे32:14Instagram के ऊपर एकदम मैसेज कर सकते हैं32:16दी गौतम लखानी आपको मेरा Instagram हैंडल32:19देखने को मिल जाएगा आप आराम से मुझे मैसेज32:21करिए। कोई दिक्कत नहीं है। कोई परेशानी32:22नहीं है। फॉलो कर लेंगे तो और अच्छी बात32:24है। ठीक है? सो ऑल द बेस्ट। आगे चलते हैं।32:27गौतम भैया इज ऑलवेज अवेलेबल फॉर यू। सिंपल32:30सी बात है। अब देखिए गाइस क्या होता है?32:32हम क्या देखते हैं कि अंग्रेजों ने भारत32:34के अंदर लोगों को मरने के लिए ही नहीं32:37छोड़ा। भारत के अंदर इकोनॉमिकली लोगों को32:40एक्सप्लइट करने का काम भी यहां पर करा। हम32:42देखते हैं कि जो ब्रिटिशर्स की पॉलिसी थी,32:45उसका मेन टारगेट क्या था? मेन ऑब्जेक्टिव32:48क्या था? कि भैया भारत से जो वेल्थ है32:51उसको हमें कहां लेकर के जाना है? ब्रिटेन32:53के इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन के लिए ले जाना32:55है। यानी कि भारत से रिसोर्सेज का32:58इस्तेमाल करना है। भारत के अंदर से33:00रिसोर्सेज को निकालना है और उसे ब्रिटेन33:02लेकर के जाना है वहां की इंडस्ट्रीज के33:04लिए। वहां के इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन के33:06लिए। हम देखते हैं कि एक यूएस हिस्टोरियन33:09हुए जिनका नाम था ब्रूक एडमम्स। वो क्या33:11कहते हैं? वो कहते हैं कि भैया ब्रिटेन की33:14जो इकोनॉमिक ग्रोथ हमें देखने को मिली33:161760 से ब्रिटेन जो इकोनॉमिकली डेवलप करा33:201760 से वो किस वजह से करा वो बंगाल की33:22वजह से करा। अंग्रेज क्या करते थे? बंगाल33:25से लूट के ब्रिटेन को डेवलप करते थे। यानी33:29कि क्या हो रहा था? हमारी गाड़ी से तेल33:31चोरी करके अपनी गाड़ी में भर रहे थे। समझ33:33आ रहा है क्या? हम देख रहे हैं कि यार33:35ब्रिटिशर्स की गाड़ी हमारी गाड़ी से तेज33:37कहीं से भाग रही है। तो हमें देखने को मिल33:39रहा है कि अरे भैया ये तो हमारे पेट्रोल33:41टैंक से अपने पेट्रोल टैंक में लगाए हुए33:42हैं पाइप को इसलिए हो रहा है। तो भारत से33:46पैसे को लूटा जा रहा था और ब्रिटेन की33:48इकॉनमी को उससे बूस्ट करा जा रहा था।33:50ब्रिटेन की इकॉनमी को उससे फायदा पहुंचाया33:52जा रहा था। तो जो भी पैसा भारत से था भारत33:55के रिसोर्सेज जो थे वो ब्रिटेन की33:57इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन के लिए इस्तेमाल33:59करा गया। और हम देखते हैं कि इसका रिजल्ट34:01क्या हुआ कि भारत से इतना ज्यादा पैसा34:04लूटा गया, इतने ज्यादा रिसोर्सेज लूटे गए34:07और उन रिसोर्सेज का इस्तेमाल जो है अपने34:10इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के लिए करा और उससे34:12जो प्रॉफिट कमाया उस प्रॉफिट के बारे में34:14तो आप सोच भी नहीं सकते। आप इमेजिन भी34:16नहीं कर सकते। इतना ज्यादा प्रॉफिट था। हम34:18क्या देखते हैं? हम यहां पर देखते हैं कि34:20कई इकोनॉमिस्ट ने कई हिस्टोरियंस ने इस34:23ड्रेन ऑफ वेल्थ के बारे में लिखा। जैसे34:25यूएस हिस्टोरियन हुए विल डूरंट। यूएस34:28हिस्टोरियन विल डोरंट क्या बताते हैं? वो34:30बताते हैं कि भैया भारत से जो है स्टोलन34:33वेल्थ ऑफ फ्रॉम इंडिया स्टोलन वेल्थ ऑफ34:35इंडिया में वो लिखते हैं कि भारत से इतना34:37पैसा लूटा कि उस पैसे ने ब्रिटेन के अंदर34:41जो रेलवेेज का डेवलपमेंट हुआ, टेलीग्राफ34:43का डेवलपमेंट हुआ, ब्रिटिशर्स ने जो34:45वर्ल्ड वॉर लड़े या ब्रिटिशर्स ने जो पहले34:48वॉर लड़े उन सबको फाइनेंस किसने करा? भारत34:51से जो पैसा लूट करके आ रहा था उसने करा।34:53तो आप इमेजिन कर सकते हो कि भारत के34:56रिसोर्सेज का इस्तेमाल ब्रिटेन के34:58डेवलपमेंट के लिए हो रहा है। हमारे भी कुछ34:59हिस्टोरियंस रहे जैसे कि दादा भाई नौरोजी35:01की हम बात करें वो अपनी बुक पॉवर्टी एंड35:04अनब्रिटिश रूल इन इंडिया में लिखते हैं।35:06रमेश चंद्र दत्त आरसी दत्त की अगर हम बात35:08करें तो अपनी किताब इकोनॉमिक ऑफ इकोनमिक35:11हिस्ट्री ऑफ इंडिया के अंदर लिखते हैं कि35:13अंग्रेजों ने भारत से बिलियंस ऑफ पाउंड्स35:16की लूट करी। अगर हम हिसाब लगा के देखें तो35:19कहा जाता है एक मॉडर्न मॉडर्न एस्टीमेट की35:22बात करें तो उतना उत्सा पटनायक क्या बताती35:25हैं कि भारत से अंग्रेजों ने 45 ट्रिलियन35:28यूएस डॉलर्स लूटे इमेजिन कर पा रहे हो 4535:33ट्रिलियन यूएस डॉलर्स लूटे और ये आज के35:36समय का जो ब्रिटेन का जीडीपी है ना उसका35:3913 गुना है 13 टाइम्स है। कैन यू इमेजिन35:42दिस? क्या आप इमेजिन कर सकते हो कि उस35:45टाइम पर उस टाइम पर अगर हम हिसाब लगा करके35:48देखें तो 1765 से लेकर के 1938 के बीच35:52अंग्रेजों ने भारत से कितने लूटे 4535:55ट्रिलियन यूएस डॉलर्स लूटे जो आज के समय35:59पर ब्रिटेन के जीडीपी का 13 टाइम्स है 1336:02गुना है और यह तो ऑफिशियल नंबर है इससे36:04ज्यादा तो पता नहीं कितना होगा भाई तो ये36:07सारी चीजें बच्चा हमें बताती हैं दिखाती36:09हैं कि किस तरीके से भारत की वेल्थ का36:12भारत के रिसोर्सेज का इस्तेमाल ब्रिटेन के36:15डेवलपमेंट के लिए ब्रिटेन के रिसोर्सेज को36:18एंपावर करने के लिए करा गया। ब्रिटेन के36:20लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया।36:22वहीं दूसरी तरफ भारत के अंदर लोग मर रहे36:25थे। भूख से तड़प रहे थे और स्टार्वेशन36:29जैसी, पॉवर्टी जैसी प्रॉब्लम्स भारत के36:31अंदर हमें देखने को मिली। और आप इमेजिन कर36:34पा रहे हैं कि उसके बावजूद भी आज भारत36:38वर्ल्ड की फोर्थ लार्जेस्ट इकॉनमी है।36:40काहे यूएसए हमारे से सड़ता है। काहे36:43ब्रिटेन फ्रांस हमारे से जलते हैं।36:45क्योंकि उन्हें पता है कि ये भारत के लोग36:47वो लोग हैं जिन्हें अंग्रेजों ने36:51ब्रिटिशर्स ने जीरो क्या माइनस के अंदर ला36:54के खड़ा कर दिया था। और ये उस माइनस से आज36:56यहां पर पहुंचे हैं। और अगर ये इंडियंस37:00अपने और डेवलपमेंट पर ध्यान दे, बाकी37:02चीजों पर ध्यान दे तो ये कहां से कहां37:04पहुंच जाएंगे भाई? तो इसीलिए डरते हैं37:06हमसे जलते हैं हमसे। समझ रहे हो? तो ये37:09सारी चीजें हमें दिखाती हैं, बताती हैं कि37:12किस तरीके से अंग्रेजों ने भारत को लूटा।37:14और ये ड्रेन ऑफ इंडियास वेल्थ जीता जागता37:17एग्जांपल है कि व्हाई आज के समय पर हम37:20इतनी ज्यादा गरीबी पॉवर्टी की प्रॉब्लम्स37:22को सफर कर रहे हैं। और वहीं ब्रिटेन आज37:23क्यों इतना अपने आप को वाइट कॉलर लगा के37:26टाई शाई लगा करके अपने आप को नवाब बनता है37:28क्योंकि हमरा पैसा है भैया हमारा लूटा हुआ37:31है। क्या कहते हो मांग लें? मोदी जी को37:33बोले कि भैया पैसा वापस लाओ यह वाला।37:36ब्रिटेन रो देगा। ब्रिटेन रोने लग जाएगा37:39कि अरे भैया हम कहां से लाएं भैया? हम तो37:41वया गरीब हैं भैया हम कहां से लाएंगे भैया37:44यूं करने लग जाएगा ब्रिटेन तो ये सारे37:46चैलेंजेस ये सारी चीजें हमें दिखाती हैं37:48कि किस तरीके से ब्रिटेन के अंदर लोगों ने37:51ब्रिटेन के लीडर्स ने भारत को लूटा भारत37:54के रिसोर्सेज का भारत के वेल्थ का37:55इस्तेमाल अपने डेवलपमेंट के लिए वहां पर37:57करा अब बात करेंगे आगे की चेंजिंग38:00लैंडस्केप्स की कि सिर्फ पैसा ही नहीं38:03लूटा सिर्फ भारत के अंदर बाकी चीजें ही38:05नहीं करी भारत का जो एक तरीके से गवर्नेंस38:09का स्टाइल था पॉलिटिकल सिस्टम था। एजुकेशन38:11था। उन सब चीजों को भी बदलने का काम करा।38:14उन सब चीजों को भी खराब करने का काम करा।38:16अब उसके बारे में हम यहां पर बच्चा जी बात38:18करेंगे। तो देखिए क्या होता है?38:21हम क्या देखते थे कि जब अंग्रेज भारत आए38:24तो उस टाइम पर भारत को सोने की चिड़िया38:27कहा जाता था। और खासतौर पर इंडियन38:30टेक्सटाइल जो होता था इंडिया का जो कपड़ा38:32होता था पूरे वर्ल्ड में फेमस था। यहां तक38:34कि ब्रिटेन की जो महारानी थी क्वीन38:36एलिजाबेथ वो भी भारत का बना हुआ कपड़ा यूज38:40करती थी। उसके बने हुए अपना गाउंस और जो38:43भी उनके ड्रेसेस थी वो सिलवाती नहीं। यानी38:45कि भारत की टेक्सटाइल भारत का38:47मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इतना ज्यादा38:49स्ट्रांग था। चाहे हमारा कॉटन हो, सिल्क38:51हो, वूल हो, जूट हो, हैंमप हो ये कॉटन38:54टेक्सटाइल हो ये तो मतलब मार्वलस थे,38:57आउटस्टैंडिंग थे। तो इंडिया का जो38:59इंडस्ट्रियल सेटअप था 18th सेंचुरी से39:02पहले अंग्रेजों के भारत में आने से पहले39:04वो बहुत ही ज्यादा क्या था बच्चा जी फेमस39:06था। हम देखते हैं। बट हम क्या देखते हैं39:08कि जब ब्रिटिशर्स भारत आए ब्रिटिशर्स ने39:10भारत के अंदर आकर के रूल करना शुरू करा तो39:13उन्होंने क्या करा? उन्होंने हैवी टैक्सेस39:16जो हैं भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट के39:19ऊपर लगा दिए। उन्होंने कहा कि भैया देखो39:21ऐसा है। हम हम क्या कर रहे हैं? अब हम जो39:24है देखो इंडिया से सामान जो है क्या होता39:27था? इंडिया से सामान जो है बच्चा जी39:29ब्रिटेन जाता था। अब क्या करा? अब39:32इन्होंने ये करा कि इंडिया से जो सामान39:34ब्रिटेन जाएगा उसके ऊपर हम टैक्सेस लगा39:36देंगे बहुत ज्यादा। तो ये सामान महंगा हो39:38जाएगा। ब्रिटेन में कोई इसको खरीदेगा39:39नहीं। वहीं ब्रिटेन में जो सस्ता सामान बन39:42रहा है वो भारत आएगा। उसके ऊपर कोई टैक्स39:44नहीं लगाया जाएगा। अब बताओ यानी कि हमारा39:47सामान अगर वहां जाएगा तो उसके ऊपर टैक्सेस39:49हैं बहुत ज्यादा। उसे कोई खरीदेगा नहीं।39:51नहीं वो इतना महंगा हो जाएगा और वहां का39:53जो घटिया सामान भारत में आएगा वो सस्ता39:55आएगा। तो इससे क्या हुआ? इससे यह हुआ कि39:57ब्रिटिश गुड्स अब इंडिया में बिना टैक्सेस40:00के आ सकते थे। दूसरी तरफ भारत के गुड्स40:03विदेश के अंदर जाकर के ब्रिटेन के अंदर के40:05अंदर जाकर के बिकेंगे नहीं क्योंकि उनके40:07ऊपर हैवी टैक्सेस है वो महंगे हो जाएंगे।40:09साथ ही साथ अंग्रेजों ने क्या करा? पूरी40:11तरीके से सी ट्रेड के ऊपर कंट्रोल कर40:13लिया। इंडियन ट्रेडर्स को एक्सपोर्ट करने40:15से मना कर दिया। मुश्किल कर दिया बहुत40:17ज्यादा। और हम देखते हैं कि इससे क्या हुआ40:19कि जो इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री थी भारत40:21के अंदर जो लोग कपड़ा बनाते थे कपड़े का40:23व्यापार करते थे उनका डिक्लाइन आने लगा40:25उन्हें लॉसेस होने लगे। तो ये सारे40:27चैलेंजेस ये सारी प्रॉब्लम्स बचा जी हमें40:30यहां पर होती हुई विद द टाइम देखने को40:31मिली। आगे चलकर के हम क्या देखते हैं कि40:3319th सेंचुरी 19 सेंचुरी का मतलब क्या है40:36बेटा? 19th सेंचुरी का मतलब है 1801 से40:39लेकर के 1900 का जो पीरियड है। इस बीच40:41क्या हुआ? इस बीच हम देखते हैं कि इंडियन40:43टेक्सटाइल के जो एक्सपोर्ट है वो बहुत40:45तेजी के साथ गिरने लगे। भारत के अंदर जो40:48हमारे आर्टिजंस थे जो बेचारे बहुत40:50बढ़िया-बढ़िया कपड़े बनाते थे जो व्यूअर्स40:52थे वो क्या करने लगे भैया? वो गरीबी के40:54अंदर जाने लगे। वो क्या करने लगे? बेचारे40:56जाकर के खेती करने लगे। उनको अपने काम40:58छोड़ने पड़े। उन्हें अपनी जॉब छोड़नी41:00पड़ी। क्योंकि उनका अब बनाया हुआ कपड़ा41:02कोई खरीद नहीं रहा था। अगर हम बात करें41:05यहां पर उस टाइम पर गवर्नर जनरल विलियम41:07बेंटिक की। विलियम बेंटिक क्या लिखता है?41:09विलियम बेंटिक लिखता है द बोनस ऑफ द कॉटन41:12वीवर्स आर ब्लीचिंग इन द प्लेेंस ऑफ41:14इंडिया कि भैया जो भारत के वीवर्स हैं जो41:19कपड़ा बुनते थे जो कपड़ा बनाते थे उनकी41:21हड्डियां क्या कर रही हैं भारत को ब्लीच41:24कर रहे हैं मतलब भारत को भारत का जो41:26प्लेेंस है वो उनकी हड्डियों से भरा हुआ41:29है यानी कि ये बताता है कि कैसे भारत के41:32अंदर जो व्यूअर्स थे उनकी जॉब्स गई उनके41:34पास रिसोर्सेज नहीं थे कैसे भूख से41:38पॉवर्टी से गरीबी से उन्हें अपनी जान देनी41:41पड़ी। तो यह किसकी बात है? अंग्रेजों के41:44ही गवर्नर जनरल की बात है जो 1834 में ये41:46बात लिखता है। खुद लिख रहा है वो कि भैया41:49हमारी पॉलिसी से ये हो गया। और हम क्या41:51देखते हैं कि सिर्फ कॉटन इंडस्ट्री ही41:53नहीं आयरन एंड स्टील इंडस्ट्री, पेपर41:55इंडस्ट्री इन सब इंडस्ट्रीज के अंदर41:57डिक्लाइन आया। हम देखते हैं कि पहले जब41:59अंग्रेज भारत आए थे तो उस टाइम पर वर्ल्ड42:02जीडीपी के अंदर इंडिया का कंट्रीब्यूशन अप42:05टू 25% था। ये कम हो के कितना हो गया? 5%42:08से भी कम हो गया। 5% से भी कम हो गया। और42:11भारत एक पुरेस्ट कंट्री बन गया। जो भारत42:14कभी गोल्डन स्परो था, सोने की चिड़िया था42:17वो एकदम गरीब हो गया। वो एकदम पुअर हो42:19गया। ये सारी चीजें हमें यहां पर होती हुई42:22देखने को मिली। यहां तक कि जो गवर्नेंस42:25स्टाइल था हमारे देश के अंदर लोगों को जो42:27मैनेज करा जाता था उसमें भी चेंजेस करे।42:29इंडिया में पहले क्या होता था? लोकल राजा42:31महाराजा होते थे। ये लोकल महाराज राजा42:34महाराजा अलग-अलग एरियाज में क्या करते थे42:36कि गांव देहात के अंदर अपना ये पंचायत42:39चौधरी इस टाइप का सिस्टम लेकर के चलते थे।42:41विलेज काउंसिल्स होती थी कि एक तो राजा तो42:44है ही भाई राजा महाराजा तो है ही बट जो42:46गांव है वो क्या करते थे गांव के अंदर कुछ42:48लोगों को अपॉइंट कर देते थे पढ़े लिखे42:51लोगों को पैसे वाले लोगों को अच्छे लोगों42:52को कि भैया आप अपने-अपने गांव का42:54एडमिनिस्ट्रेशन संभालना विलेज काउंसिल्स42:56होती थी ये लोग क्या करते थे लोगों की कोई42:58प्रॉब्लम्स हो उसको देखते थे पब्लिक वर्क43:00करते थे इरीगेशन रोड सब चीजों पे ध्यान43:02देते थे यानी कि कुल मिलाकर के हम क्या43:04देखते हैं कि ये लोकल नीड्स के हिसाब से43:07लोगों की जरूरतों के हिसाब से काम करते थे43:09बट अंग्रेजों ने क्या करा। अंग्रेजों ने43:11कहा कि हां नहीं ये सिस्टम ठीक नहीं है।43:14अंग्रेजों ने क्या कहा कि नहीं भैया यह43:15सिस्टम ठीक नहीं है। क्यों? क्योंकि यहां43:17पर बहुत बेहतर तरीके से चीजें अपने आप हो43:19रही थी। लोग खुद ही सेल्फ रिलायंट थे,43:22इंडिपेंडेंट थे। राजा को तो क्या चाहिए43:24होता था कि भैया मुझे तो बस रेवेन्यू दे43:25देना। तुम मेरे अंडर हो। बाकी अपना-अपना43:27लेवल पर तुम संभालते रहो चीजें। मुझे कोई43:29दिक्कत नहीं है। बट यहां पर अंग्रेजों ने43:31क्या करा? अंग्रेजों ने आकर के अपना43:34सेंट्रलाइज्ड ब्यूरोक्रेटिक सिस्टम लाया।43:36अंग्रेजों ने अपने ऑफिशियल्स अपॉइंट कर43:38दिए। अब ये ऑफिशियल्स क्या करते थे? ये43:40टैक्स कलेक्शन करते थे, पैसा कलेक्ट करते43:43थे। बट ये क्या करते थे? पब्लिक वेलफेयर43:45पर कोई काम नहीं करते थे। इन्होंने क्या43:48करना शुरू करा कि विलेजेस के अंदर जो43:50कम्युनिटीज थी उनको खराब करना शुरू कर43:52दिया। बर्बाद करना शुरू कर दिया। पहले43:54क्या होता था कि मान लो एक गांव है। एक43:56गांव के अंदर कुछ लोग हैं जो उस गांव के43:58एडमिनिस्ट्रेशन को संभाल रहे हैं। वो क्या44:00करते थे? गांव से टैक्स कलेक्ट करते थे।44:02उस टैक्स में से कुछ पैसा राजा कहता था कि44:04मुझे दे दो। बाकी पैसा तुम अपने डेवलपमेंट44:06के लिए इस्तेमाल में कर लो। अपने लॉ एंड44:08ऑर्डर को मेंटेन करने में कर लो। अपनी44:10सेफ्टी के लिए, अपने डेवलपमेंट के लिए कर44:12लो। इन्होंने क्या कहा? इन्होंने आकर के44:14क्या कहा कि भैया टैक्स तो हमें दे दो। बट44:16पब्लिक वेलफेयर की उम्मीद ना रखो हमारे44:18से। ये मत सोचना कि हम सड़कें बनाएंगे44:19तुम्हारे यहां आकर के पानी की व्यवस्था44:21करेंगे। ना बाबा ना हमें तो पैसा चाहिए44:23बस। तो इस तरीके से भारत के अंदर भारत के44:26लोगों को लूटा गया। भारत के अंदर क्या करा44:29गया? इस तरीके के कानून बना दिए गए जो44:32कानून बहुत ज्यादा क्या थे? एक्सपेंसिव44:34थे। यानी कि अगर कोई उन कानूनों को तोड़ता44:36था तो उसके ऊपर बहुत ज्यादा टैक्सेस लगा44:38दिए जाते थे। बहुत ज्यादा पेनल्टीज लगा दी44:40जाती थी। पूरा का पूरा जो इंडियन पीनल कोड44:43था वो अंग्रेजों ने अपनी भाषा के अंदर44:46रखा। अब बताओ भारत के अंदर कोई व्यक्ति44:49अगर कुछ गलत काम कर रहा है तो वो अंग्रेज44:51के सामने जाकर के खड़ा हो रहा है। अंग्रेज44:53उसे सजा सुना रहा है। कितना बेकार है यार44:55ये। और अंग्रेज लिख रहा है ऑर्डर ऑर्डर44:58ऑर्डर। यू आर बीइंग पनिश्ड। यह एंड वो वो45:01बेचारा गरीब किसान कह रहा है जी हमें तो45:03समझना आया आपने क्या कहा और फिर किसान को45:06लूटा जाता था उसे परेशान करा जाता था उसे45:08और ज्यादा क्या करा जाता था एक तरीके से45:11टॉर्चर करा जाता था एंड अफसोस की बात मुझे45:14मतलब ठीक है कहना नहीं चाहिए बट कहीं ना45:17कहीं जुडिशरी के अंदर आज भी वो कॉलोनियल45:19टच मुझे देखने को मिलता है। आज भी जो45:21हमारे कानून है वो इतने ज्यादा45:23कॉम्प्लेक्स है कि आम आदमी उनको पढ़ के45:25समझ ही नहीं सकता कि यार लिखा क्या है45:27उसमें45:29है ना तो ये चैलेंजेस ये प्रॉब्लम्स हमें45:31कहीं ना कहीं देखने को मिली हमारा जो एक45:33गवर्नेंस सिस्टम था हमारे देश के अंदर जो45:35प्रॉपर तरीके से चीजें चल रही थी उसको भी45:38बर्बाद करने का डिस्मेंटल करने का काम45:40अंग्रेजों ने करा अब बात आई इंडिया के45:42एजुकेशन सिस्टम की तो देखो किसी भी देश के45:45डेवलपमेंट के लिए वहां का एजुकेशन सिस्टम45:47बच्चा जी बहुत मायने रखता है बहुत45:49इंपॉर्टेंट होता है क्योंकि अगर किसी देश45:51का एजुकेशन सिस्टम ही खराब होगा तो देश45:53क्या करेगा? कुछ भी नहीं कर पाएगा भाई। अब45:55बारी आई इंडिया के एजुकेशन सिस्टम की। तो45:58देखो इंडिया के अंदर क्या था? भारत के46:00अंदर हम देखते थे कि पाठशाला, मदरसा,46:02विहार इस तरीके से अलग-अलग तरीके से लोगों46:05को टीचिंग के साथ-साथ प्रैक्टिकल स्किल्स46:08भी सिखाई जाती थी। कल्चरल स्किल्स भी46:10सिखाई जाती थी। सिर्फ जो पढ़ाई होती थी वो46:12किताबी ज्ञान नहीं होता था बच्चा। वो46:14पढ़ाई के अंदर हम क्या देखते हैं कि पढ़ाई46:16के साथ-साथ लोगों को और स्किल्स भी सिखाई46:18जा रही हैं। लोगों को बाकी बातें भी बताई46:20जा रही हैं। लोगों को ट्रेन करा जा रहा है46:22कि यार सिर्फ किताब पढ़ने से तेरा काम46:25नहीं बनेगा। तुझे जो है बाकी चीजें भी आनी46:27चाहिए। रिस्पांसिबिलिटीज दी जाती थी लोगों46:29को। अब यहां क्या हो रहा है? यहां अंग्रेज46:31आ गए। इंडिया 50 अंग्रेजों की रिपोर्ट46:35बताती है कि भारत के अंदर 19th सेंचुरी46:37में 1 लाख से लेकर के 1.5 लाख विलेज46:40स्कूल्स पाठशाला वगैरह थी। जहां पर बंगाल46:43बिहार के अंदर अकेले सिर्फ बंगाल बिहार के46:46इलाकों में डेढ़ लाख तक विलेज पाठशाला थी।46:48जहां पर बच्चों को पढ़ाया जाता था, सिखाया46:51जाता था, मैथ्स के बारे में बताया जाता46:52था। और इंडिया का जो ये पूरा का पूरा46:55एजुकेशन सिस्टम था वो लोगों की जरूरतों के46:58हिसाब से था। कैसे? कि भैया मान करके चलो47:01कि अब खेतों के अंदर काम करने का समय है।47:04कि खेतों के अंदर फसल लगाने का समय है। तो47:07बच्चों को उन दिनों स्कूल नहीं बुलाया47:08जाता था कि नहीं भाई अभी तुम जाओ जाकर के47:10अपने पेरेंट्स की मदद करो। खेती के अंदर47:12हाथ बटाओ उनका और जब वो काम हो जाता था47:14फिर आओ आकर के पढ़ो। तो इस तरीके से ऐसा47:17सिस्टम बनाया गया था। बहुत फ्लेक्सिबल47:19सिस्टम था कि बच्चों को पढ़ाई भी दी जा47:21रही है। प्रैक्टिकल नॉलेज भी दी जा रही47:23है। एकदम आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।47:25अंग्रेज आए जिसमें थॉमस मैकोलय हमें देखने47:27को मिलता है। इस थॉमस मैकलॉय ने 1835 में47:30क्या करा? इसने जो है इंडियन एजुकेशन को47:33बदलने का काम यहां पर करा। इसने कहा कि47:35भैया देखो ऐसा है। यह जो इंडियन एजुकेशन47:38सिस्टम है दिस इज रबिश। दिस इज़ गार्बेज।47:41वी वांट इंडियंस टू लर्न अबाउट द यूरोपियन47:44नॉलेज, लर्न अबाउट द यूरोपियन कल्चर।47:46क्यों? क्योंकि ये चाहते थे कि ऐसे47:49इंडियंस बनाए जाए जो इंडियंस47:53ब्लड से तो अंग्रेज हो, कलर से ओ सॉरी47:56ब्लड से और कलर से तो भारतीय हो बट नेचर48:00से, टेस्ट से, ओपिनियन से अंग्रेज हो। समझ48:03रहे हो? मैकोलॉय की पॉलिसी क्या कहती थी?48:06मैकोलॉय चाहता था कि भारत के अंदर भारत के48:09लोगों को हम ऐसा कर दें कि देखने में,48:12बोलने में, समझने में बाय ब्लड तो वो48:15इंडियन लगे। बट असल में क्या होने चाहिए?48:18असल में उनका दिमाग, उनकी सोच कैसी होनी48:20चाहिए? अंग्रेजों जैसी होनी चाहिए। ब्राउन48:22इंग्लिश मैन। ब्राउन इंग्लिश मैन की48:24इन्होंने बात करी कि भैया हमें ये इंडियन48:27का जो कल्चर है, इंडियन एजुकेशन सिस्टम48:28है, इसको खत्म करना है और ब्राउन इंग्लिश48:30मैन बनाने हैं। एंड अफसोस की बात है कि48:33आजादी के इतने साल बाद भी हमारा एजुकेशन48:36सिस्टम कहीं ना कहीं उसी तरीके से काम48:38करता है। आज भी हम क्या है? अपनी भाषा48:41बोलने से हमें डर लगता है। अंग्रेजी अगर48:43कोई हमारे सामने आकर के अच्छी बोल दे तो48:45हम कहते हैं ओ ये तो बहुत पढ़ा लिखा है।48:47वहीं कोई अच्छी हिंदी बोले, संस्कृत बोले,48:50हम कहेंगे नो नो नो ही इज़ स्पीकिंग हिंदी।48:54सी चेक हिम। व्हाट इज दिस? बेकार चीज है48:57भाई बिल्कुल। हमें अपने कल्चर के अंदर,49:00अपने पास्ट के अंदर, अपनी हिस्ट्री के49:03अंदर प्राइड महसूस करना चाहिए। और49:05अंग्रेजों ने मतलब 200 साल तक लोगों के49:08दिमाग में वो फीड। 200 साल भी क्यों यार?49:101835 में ये शुरू हुआ। 1947 तक ये चला। ये49:14100 120 साल के अंदर लोगों के दिमाग में49:16इतना फीड करा कि आज भी हमें लगता है कि49:18यार अंग्रेज इज अंग्रेज। आज भी अगर हम49:21देखें तो हम हम लोगों को कैसे परखते हैं।49:24अगर हमें कोई फेयर स्किन वाला मिल जाता49:26है, फेयर कॉम्प्लेक्शन वाला मिल जाता है49:28तो हम क्या कहते हैं कि अरे यार देखो49:30कितना स्मार्ट लग रहा है। कितना हैंडसम लग49:32रहा है। बट हम भूल जाते हैं कि हमारे49:34भगवान श्री राम हुए। हमारे भगवान श्री49:36कृष्ण हुए। उन सबका कॉम्प्लेक्शन ब्राउन49:38था। क्यों? व्हाई वी स्टिल फेंटसाइज अबाउट49:42द वाइट या फेयर कॉम्प्लेक्शन क्यों हमें49:45गोरे लोग अच्छे लगते हैं। क्यों हम कहते49:47हैं कि वाह वाह वाह देखो ये क्यों? बिकॉज़49:49ऑफ दैट माइंडसेट जो अंग्रेजों ने पैदा करा49:51जो अंग्रेजों ने लोगों के दिमाग में चीजें49:53भरी उस वजह से। तो ये सारी चीजें कहीं ना49:56कहीं क्या देखते हैं हम कि लोगों को हमारे49:58इंडियन कल्चर को बर्बाद करने के लिए खत्म50:00करने के लिए सारी चीजें यहां पर करी गई।50:02तो ब्रिटिश एजुकेशन सिस्टम जो था उसने50:04इंडिया के अंदर इंग्लिश एजुकेटेड क्लर्क50:07बनाए जो क्या करें जो अंग्रेजों के लिए50:10पढ़ाई करें। अंग्रेजों को सर्व करने के50:11लिए पढ़ाई करें। ऐसा बताया गया कि भैया50:14इंग्लिश जो है वही एक इकलौती भाषा है जो50:16तुम्हें पढ़ाना है। अगर तुम समाज में कुछ50:18अच्छा करना चाहते हो तो सिर्फ अंग्रेजी50:20भाषा ही तुम्हारा उत्थान कर सकती है। और50:23ये मैकोलॉय की प्रिंस पॉलिसी का डोमिनेटेड50:26फीचर हमें यहां पर देखने को मिलता है। और50:28इस पॉलिसी ने भारत के कल्चर को भारत की50:30एजुकेशन को पूरी तरीके से बर्बाद करके रख50:32दिया। आज भी हम यही सोचते हैं। यह तो50:35शुक्र है हमारे प्रधानमंत्री जी का कि जब50:38वो किसी देश में जाते हैं तो अपनी भाषा50:40में बात करते हैं। क्या एक बात मुझे बताओ50:42जब पुतिन इंडिया आता है या पुतिन कहीं पर50:44जाते हैं तो क्या वो इंग्लिश में बात करते50:46हैं? नो ही स्पीक्स इन रशियन। क्या इटली50:49की जो प्राइम मिनिस्टर हैं वो कहीं जाती50:51हैं तो वो क्या इंग्लिश में बात करती है?50:52नो शी स्पीक्स इन इटालियन। अगर फ्रेंच के50:55फ्रांस के प्राइम प्रेसिडेंट कहीं जाते50:57हैं तो वो क्या इंग्लिश में बात करते हैं?50:59नो ही स्पीक्स इन फ्रेंच।51:02बट हम क्या है? हम इंडियन होने के बावजूद51:04भी हम अंग्रेजी में जाकर के हर जगह बात51:05करते थे। ठीक है? अंग्रेजी सबके लिए समझने51:08में आसान है। बट वी आर सम हाउ अंडरमाइनिंग51:11आवर कल्चर। तो जब मोदी जी 2014 में51:14प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने हर जगह जाकर51:16के हिंदी भाषा में बात करनी शुरू करी कि51:19अगर ट्रंप को मेरे से बात करनी है तो उसे51:21बंदा बिठाना पड़ेगा समझने के लिए। मैं तो51:23हिंदी में बात करूंगा। भाई बात है साफ। और51:25बहुत अच्छी बात है यार। अपनी भाषा के51:28अंदर, अपने कल्चर के अंदर हमें गर्व महसूस51:30करना चाहिए। प्राइड महसूस करना चाहिए। और51:32मैं तो चाहता हूं कि कल को मान लीजिए कोई51:34और प्रधानमंत्री बनते हैं हमारे देश के51:36मोदी जी के बाद अगर मान लो वो साउथ इंडिया51:39से कहीं से बन जाते हैं या भारत की किसी51:42भी हिस्से से बनते हैं तो अपनी भाषा में51:43जाकर के बोले मुझे जितना मुझे प्राउड फील51:46हिंदी भाषा सुनने पर होगा उतना ही प्राउड51:48फील मुझे मराठी बंगाली या तमिल तेलुगु51:51सुनने पर होगा इंटरनेशनल स्टेजेस के ऊपर51:54बिकॉज़ ऑल आर माय लैंग्वेजेस इंडियन51:56लैंग्वेजेस भारत की भाषाएं हैं वो भारत की51:58संस्कृति है भारत का कल्चर है वो जिसे52:00अंग्रेजों ने बर्बाद करा और इट इज आवर52:02रिस्पांसिबिलिटी कि हम इस कल्चर को दोबारा52:05से आगे लेकर के जाएं। तो कुल मिलाकर के52:07बच्चा जी हम क्या देखते हैं कि अंग्रेजों52:09ने भारत के अंदर ब्राउन इंग्लिश मैन बनाने52:12का काम यहां पर करा और ये एक सैड रियलिटी52:15है जो आज भी कहीं ना कहीं एकिस्ट हमें52:16होती हुई भारत के अंदर देखने को मिलती है।52:20अब देखो ये तो हो गया पूरा का पूरा52:22गवर्नेंस एजुकेशन इन चीजों के बारे में।52:25अब बात आती है भारत के इकोनॉमिक स्ट्रक्चर52:28को लेकर के कि कैसे इंडिया का इकोनॉमिक52:32स्ट्रक्चर बदला गया अंग्रेजों की जरूरतों52:35को पूरा करने के लिए। अब हम इसके बारे में52:37बात करेंगे। देखिए जब हम ब्रिटिशर्स की52:39बात करते हैं तो ब्रिटिशर्स ने क्या करा?52:42ब्रिटिशर्स ने इंडिया की जो सेल्फ52:44सफिशिएंट इकॉनमी थी यानी कि भारत के अंदर52:47लोग जो अपने हिसाब से अपने तरीके से काम52:49कर रहे थे। इस पूरे के पूरे सिस्टम को52:52क्या कर दिया? इस पूरे के पूरे सिस्टम को52:54रॉ मटेरियल सप्लायर के अंदर बदल दिया।52:56यानी कि अब क्या होने लगा? अब भारत के52:58अंदर जो भी एग्रीकल्चर होता था वो53:00अंग्रेजों के हिसाब से होता था कि भैया53:03अंग्रेजों को जो है भैया कॉटन चाहिए,53:05कपड़ा बनाना है। भैया अंग्रेजों को जो है53:07चाय पीनी है। क्योंकि उन्हें ठंड लगती है।53:09हम काहे चाय बना करके देंगे भाई? हम तो53:12दूध पीने वाले लोग हैं। छाछम्ठा पीने वाले53:14लोग हैं। हमें चाय की लत डलवा दी कि भैया53:16चाय पियो। अब आप क्या है? सुबह शाम चाय53:18चाहिए तुम्हें? पीते हो या नहीं पीते चाय?53:21तो ये चाय अंग्रेजों से पहले भारत में53:23नहीं आती थी। चाय हो गई, कॉफी हो गई। ये53:25सारी चीजें जो ब्रिटिशर्स को चाहिए होती53:28थी, ब्रिटिश मार्केट के अंदर चाहिए होती53:30थी, वो इंडिया के अंदर लगाई गई। इंडिया के53:32लोगों ने उस एग्रीकल्चर पर ध्यान देना53:34शुरू करा। पहले हमारा ऑब्जेक्टिव क्या53:36होता था? पहले हमारा ऑब्जेक्टिव होता था53:38कि भारत के लोगों के लिए, भारत के कल्चर53:40के लिए, भारत की जनता के लिए हम खेती53:42करेंगे। अब क्या होने लगा कि नहीं भैया जो53:44अंग्रेजों को चाहिए हम वो करेंगे। क्यों?53:46क्योंकि अंग्रेजों ने ऐसा सिस्टम भारत के53:48अंदर बनाया। अब भारत के अंदर रेलवे53:50नेटवर्क बना दिया। कई मूर्ख हमारे भारतीय53:53बड़े खुश होते हैं कि सी अगर अंग्रेज ना53:55होते तो इंडिया में रेलवेेज कभी ना आती।53:57क्यों भाई? क्यों ना आती रेलवे? क्या54:00अंग्रेजों से पहले भारत में कुछ डेवलपमेंट54:02हुआ ही नहीं? रेल्वेज क्यों लाए? ये54:05रेलवेेज इसलिए लाए कि भैया भारत के अंदर54:08दूरदराज के इलाकों से मान करके चलो कि अगर54:11भारत के अंदर अंग्रेजों को क्या होता था?54:14अंग्रेज भारत के जो सीपोर्ट्स होते थे54:16यानी कि कॉलोनियल जो हमारी कोस्टल सिटीज54:19होती थी जैसे मुंबई हो गया, कोच्ची हो गया54:21जो समुद्र के पास के इलाके होते थे वहां54:24से सामान को यूरोप लेकर के जाते थे।54:26ब्रिटेन लेकर के जाते थे बाय शिप्स वाटर54:28वेज के थ्रू। अब सोचो किसी ने यूपी के54:32अंदर यूपी के मेरठ में किसी ने क्या करा54:35भैया? गन्ना लगाया। अब अंग्रेजों को वो जो54:37गन्ना है वो कहां लेकर के जाना है?54:39ब्रिटेन लेकर के जाना है। तो उस गन्ने को54:41पहले कहां से? यूपी से मुंबई भी तो लाना54:44पड़ेगा और वो कैसे लाया जाएगा? ट्रेन के54:46थ्रू लाया जाएगा। तो रेल्वेज का डेवलपमेंट54:48क्यों करा गया? रेल्वेज का डेवलपमेंट54:50इसलिए करा गया ताकि अंग्रेजों को इससे54:52फायदा हो ताकि अंग्रेज आसानी से जो54:55पोर्ट्स होते थे जो सी पोर्ट्स होते थे54:58वहां तक सामान को ला पाएं ताकि कभी मान लो55:01भारत के अंदर कोई युद्ध वगैरह होता है।55:03कहीं पर लड़ाई झगड़े होते हैं तो इन55:04ट्रेंस के थ्रू अपनी आर्मी को एक जगह से55:07दूसरी जगह जल्दी से भेज सके। भारत के55:09विकास के लिए काम नहीं करा रेलवेेज का।55:11भारत के और भारत के लोगों के लिए तो ट्रेन55:13में जगह भी नहीं होती थी बैठने की। बट यह55:16रेलवेेज किसके पैसे से बनाए गए? भारत और55:19भारत के लोगों के पैसे से बनाए गए। किसको55:21फायदा पहुंचाने के लिए बनाए गए? अंग्रेजों55:23को फायदा पहुंचाने के लिए बनाए गए। इंडियन55:25टैक्स रेवेन्यू से ही पूरा रेलवे नेटवर्क,55:28टेलीग्राफ, कॉलोनियल एडमिनिस्ट्रेशन,55:30मिलिट्री बेसिस अंग्रेजों का जो लेविश55:32लाइफस्टाइल होता था, अंग्रेज बैठे होते55:34थे। अब क्या था? ब्रिटेन से आए थे।55:36ब्रिटेन में वेदर ठंडा होता था। ये बैठते55:39थे भैया क्या कहते हैं? बिहार के ऑफिस में55:41कहते थे ओ हो सो मच हॉट इज हियर इट इज55:44वेरी सनी ब्रा आउट देयर कहा कि भैया एसी55:46लगाओ अब एसी कहां से आ रहा है उस टाइम पर55:49अंग्रे इंडिया के पैसे से आ रहा है बैठे55:51हैं गोरे जनाब अपना टेबल के ऊपर पैर रख के55:54मस्त मौज लेते हुए तो ये सारी चीजें बच्चा55:56हमें देखने को मिली कि इंडिया के लोगों को55:59भारत के लोगों को लूटा गया किसके56:01डेवलपमेंट के लिए अंग्रेजों के डेवलपमेंट56:03के लिए ये सारी चीजें हमें यहां पर होती56:05हुई विद द टाइम देखने को मिली बच्चा जी56:08ठीक है क्लियर है क्या यहां तक किसी का56:10कोई डाउट है? अगर कोई भी डाउट है तो आप56:11कमेंट्स में अपना डाउट मेरे से पूछ सकते56:13हैं। डाउट नहीं है, चीजें क्लियर है तो56:15वीडियो को लाइक करते जाना। साथ-साथ ये56:17नोट्स आपको टेलीग्राम चैनल पर मिल जाएंगे56:20और नीचे डिस्क्रिप्शन के अंदर भी एक लिंक56:22गिवेन है वेबसाइट का। ये नोट्स आपको उस56:24वेबसाइट के ऊपर फ्री ऑफ कॉस्ट मिलेंगे।56:26जाके आप डाउनलोड कर सकते हैं मोशन56:28फाउंडेशन नोट्स की जो वेबसाइट है वहां से।56:31साथ ही साथ तुम्हारे जो डाउट्स होते हैं56:33जैसे तुम लोग मुझे कभी-कभी कुछ बच्चे56:35Instagram के ऊपर मैसेज कर देते हैं मेरे56:37को पर्सनली वो भी आप कर सकते हो। मैं56:39हमेशा रिप्लाई करता हूं। हर बच्चों को56:40रिप्लाई करता हूं। हो सकता है कि रिप्लाई56:42आने में थोड़ा सा समय लगे क्योंकि बहुत56:44सारे मैसेजेस आते हैं बच्चों के। बट हां56:45आप लोग मुझे कर सकते हो। Instagram पर56:47फॉलो भी कर सकते हो आप। दी गौतम लखानी टी56:49एच ई जी ए यू टी ए एम एल ए के एच ए एन आई56:52दी गौतम लखानी मेरा Instagram हैंडल है।56:54आप उस पर जाइए मुझे फॉलो करिए। अपने56:57डाउट्स भेजिए। ऑलवेज वेलकम। ठीक है? आपके57:00गौतम भैया हमेशा आपके लिए खड़े हैं बच्चा।57:03अब देखिए क्या है गाइस? अब आप सोच रहे57:04होंगे कि भैया इंडिया में इतना कुछ हो रहा57:06था। भारत में इतना कुछ हो रहा था। तो क्या57:08किसी ने अंग्रेजों को रोकने की कोशिश नहीं57:10करी? क्या किसी ने अंग्रेजों के खिलाफ57:12आवाज नहीं उठाई? तो उठाई। अब हम उसी अर्ली57:15रेजिस्टेंस मूवमेंट्स के बारे में बात57:17करेंगे जिसने अंग्रेजों को अंग्रेजों की57:20अथॉरिटी को चैलेंज करने का काम करा। अब हम57:22उसी के बारे में यहां पर बच्चा जी डिस्कशन57:25भी करेंगे। अब देखिए गाइस अंग्रेज भारत के57:28अंदर इतना कुछ गलत कर रहे थे। इतनी सारी57:32पॉलिसीज जो उनकी थी वो भारत और भारत के57:35लोगों के अगेंस्ट हमें देखने को मिलती57:37हैं। अब इन पॉलिसीज के खिलाफ ऐसा नहीं कि57:40भारत में लोग शांति रहे। लोगों ने इनके57:42खिलाफ आवाज भी उठाई। जिसमें सबसे पहले हम57:45यहां पर क्या देखते हैं कि माना जाता था57:48अंग्रेजों के हिसाब से ऐसा था कि भैया कभी57:50भी जो ब्रिटिशर्स हैं उनके अगेंस्ट57:54इंडियंस आवाज उठाएंगे ही नहीं। माना जाता57:57था कि इंडियंस जो है वो एक तरीके से57:59ब्रिटिश क्राउन के का वो हीरा है जो कभी58:03भी उससे अलग नहीं हो सकता और हम देखते हैं58:05कि शुरुआत से ही ब्रिटिशर्स का यही मानना58:08था कि भारत के लोग अंग्रेजों के खिलाफ58:11नहीं जाएंगे क्योंकि इस हिसाब से58:13अंग्रेजों ने भारत और भारत के लोगों को58:16बांटा हुआ था। हम देखते हैं कि जब58:18भारतीयों की बात आती है, ब्रिटिशर्स की58:20बात आती है तो काफी सारे एरियाज ऐसे थे जो58:23अंग्रेजों के डायरेक्ट कंट्रोल के अंदर थे58:25और कई एरियाज ऐसे थे जहां पर अंग्रेजों ने58:28सब्सिडरी अलायंस वगैरह जैसी पॉलिसीज के58:30थ्रू एरियाज को अपने कंट्रोल में लिया हुआ58:33था। अब देखिए जब हम यहां पर बात करते हैं58:35सबसे पहले रिवोल्ट की वो हमें सन्यासी58:38फकीर रेबेलियन जो है बच्चा जी यहां पर58:40होता हुआ देखने को मिला अंग्रेजों के58:42खिलाफ। हम देखते हैं कि बंगाल के अंदर58:45आफ्टर द 1770 फेमाइन जो 1770 का फेमाइन58:49आया उसके बाद हम क्या देखते हैं कि58:51अंग्रेजों ने भारत के अंदर जो भी पॉलिसीज58:54बनाई वो पॉलिसीज काफी ज्यादा खराब हमें58:57देखने को मिली जैसे कि अभी हमने पीछे58:59डिस्कस भी करा तो हम देखते हैं कि हमारे59:01जो सन्यासी लोग थे यानी कि जो हिंदू हमारे59:05संत महात्मा लोग थे सन्यासी लोग थे वो हो59:07गए मुस्लिम कम्युनिटी के काफी सारे फकीर59:10हो गए जो एक जगह से दूसरी जगह पर फ्रीली59:12ट्रैवल वगैरह करते थे। धार्मिक यात्राएं59:15करते थे। चैरिटी के लिए लोगों को प्रेरित59:17करते थे, मोटिवेट करते थे। अंग्रेजों ने59:20उनको कहीं ना कहीं क्या करा? रोकने की59:22कोशिश करी। अंग्रेजों ने उनको भी कंट्रोल59:24करने की कोशिश करी। अंग्रेजों ने उनको59:26क्या कह दिया? बैंडेड्स कह दिया। कह दिया59:28कि भैया ये सन्यासी वगैरह जो है कौन है?59:30ये तो डाकू हैं। और कई बार कई महान59:33सन्यासियों को फकीरों को पकड़ के59:35अंग्रेजों ने मारा। उनको एक तरीके से59:38एग्जीक्यूट करा। हम देखते हैं कि यहां पर59:41सन्यासी और फकीरों ने उनके खिलाफ आवाज59:43उठाई। काफी सारे लेवल पर हमें ये सन्यासी59:47रिवोल्ट होता हुआ देखने को मिला। और इसके59:49बारे में इंफॉर्मेशन हमें कहां मिलती है?59:51हमें बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी की59:53नोवेल आनंद मठ के अंदर मिलती है जो कि59:56उन्होंने कब लिखी थी भैया? जो कि उन्होंने59:58लिखी थी 1882 के अंदर। और इसी आनंद मठ के1:00:02अंदर हम देखते हैं कि वंदे मातरम जो हमारा1:00:05नेशनल सॉन्ग है उसको बंकिम चंद्र1:00:08चट्टोपाध्याय जी ने लिखा था और आप सब1:00:10जानते हैं कि 150 साल वंदे मातरम के पूरे1:00:12हुए हैं। अभी हाल ही में हमारी गवर्नमेंट1:00:14ने उसको सेलिब्रेट भी करा।1:00:16तो कुल मिलाकर के आनंद मठ के अंदर बंकिम1:00:20चंद्र चट्टोपाध्याय जी की नोवेल के अंदर1:00:22हमें सन्यासी रिवोल्ट के बारे में सन्यासी1:00:25रेबेलियन के बारे में पता लगता है। जहां1:00:27पर हमारे देश के साधु महात्माओं ने संतों1:00:30ने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई। आगे1:00:32चलकर के बच्चा जी हम लोग देखते हैं कि1:00:34ट्राइबल एरियाज के अंदर भी काफी ज्यादा1:00:36लोगों ने आवाज उठाई। क्योंकि अंग्रेजों ने1:00:38क्या करा था? अंग्रेजों ने भारत के जो1:00:41जंगल थे, भारत के जो हिली एरियाज थे, जहां1:00:43पर बहुत बेहतर फॉरेस्ट थे, उन फॉरेस्ट के1:00:46अंदर जाकर के अपना कब्जा कर लिया था,1:00:48कंट्रोल कर लिया था। और वहां के जो रहने1:00:50वाले ट्राइबल्स थे, उन ट्राइबल्स के ऊपर1:00:52स्ट्रिक्ट रूल्स रेगुलेशंस लगा दिए थे1:00:54ताकि वो लोग फॉरेस्ट को फॉरेस्ट प्रोड्यूस1:00:57को एक्सप्लोर ना कर पाएं। अपने इस्तेमाल1:00:59के लिए जंगलों का इस्तेमाल ना कर पाएं। तो1:01:01हम यहां पर क्या देखते हैं बच्चा? हम यहां1:01:03पर ये देखते हैं कि एक तरफ तो अंग्रेजों1:01:05ने भारत के ट्राइबल लोगों को मना करा कि1:01:08आप भारत के जंगलों में नहीं जा सकते। आप1:01:10जाकर के लकड़ी इकट्ठा नहीं कर सकते। जो1:01:12उनका काम था उन्हें वो करने से मना करा।1:01:15दूसरी तरफ जबरदस्ती क्रिश्चियन मिशनरीज को1:01:18बोला गया कि भैया भारत के अंदर ये जो1:01:20ट्राइबल लोग हैं इन्हें क्रिश्चियनिटी के1:01:22अंदर कन्वर्ट करो। तो एक तरीके से तो1:01:24अंग्रेज इनको इकोनॉमिकली नुकसान पहुंचा1:01:26रहे थे और दूसरा इनके कल्चर को भी नुकसान1:01:29पहुंचा रहे थे कन्वर्ट करके। साथ ही साथ1:01:32जिन ट्राइबल्स ने इनके खिलाफ आवाज उठाई,1:01:34अंग्रेजों ने क्या करा? अंग्रेजों ने एक1:01:36इंडियन क्रिमिनल ट्राइब एक्ट यहां पर बना1:01:39दिया। भारत के कई ट्राइबल लोगों को भारत1:01:41के कई ऐसे हमारे जो ट्राइब्स थे जो एक जगह1:01:45से दूसरी जगह पर मूव करते थे, ट्रेड करते1:01:47थे, व्यापार करते थे उनको क्रिमिनल घोषित1:01:50कर दिया। और कहीं ना कहीं काफी सारे लोगों1:01:52को जेल में डाला गया। और हम देखते हैं कि1:01:55इस क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के खिलाफ या1:01:57फॉरेस्ट लॉस के खिलाफ भारत के अंदर काफी1:01:59सारे ट्राइबल ग्रुप्स ने आवाज भी उठाई1:02:01जिसमें 1831 1832 के अंदर हमें कोल1:02:04अपराइजिंग देखने को मिलता है। जिसके अंदर1:02:06हम देखते हैं कि छोटा नागपुर यानी कि जो1:02:08झारखंड वाला रीजन है वहां पर जो कोल1:02:11ट्राइब्स थे जिसके अंदर स्पेशली मुंडा1:02:13ट्राइब हो गए। इनके लीडर हुए बिरसा मुंडा1:02:15इन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई।1:02:17अंग्रेजों को यहां पर चैलेंज करा। बट1:02:20अनफॉर्चूनेटली अंग्रेजों ने इन सब ट्राइबल1:02:23रेबेलियंस को जो है दबाने का काम करा।1:02:26फोर्सफुली यहां पर जो इनके लीडर्स थे उनको1:02:28एग्जीक्यूट करने का काम करा, मारने का काम1:02:30करा। बच्चा। इसी तरीके से कोल अपराइजिंग1:02:33के अलावा हम संथाल रिबेलियन या संथाल1:02:35अपराइजिंग के बारे में भी पढ़ते हैं जो1:02:371855 56 के अंदर झारखंड, बिहार, वेस्ट1:02:39बंगाल वाले रीजंस के अंदर हमें होता हुआ1:02:41देखने को मिला। हम यहां पर देखते हैं कि1:02:43सांथाल ट्राइब से दो ब्रदर्स हुए सिद्धू1:02:46और कानू है ना सिद्धू और कानू मुर्मू आपको1:02:49ये मुर्मू से याद आ रहा होगा हमारी देश की1:02:51जो फिलहाल प्रेसिडेंट हैं मैडम द्रोपदी1:02:54मुर्मू शी कम्स फ्रॉम द सेम संथाल ट्राइब1:02:57ओनली एंड शी इज द फर्स्ट ट्राइबल1:02:59प्रेसिडेंट ट्राइबल प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया1:03:02है ना वो हम क्या देखते हैं शेड्यूल1:03:04ट्राइब से आने वाली पहली प्रेसिडेंट है जो1:03:06भारत की प्रेसिडेंट बनी और संथाल ट्राइब1:03:09से वो बिलोंग करती हैं उनका अगर आप उनकी1:03:11लाइफ के बारे बारे में भी जानेंगे बच्चा1:03:12तो आपको पता लगेगा कि उन्होंने भी अपने1:03:14जीवन में कितने संघर्ष करे। तभी वह आज इस1:03:17मुकाम पर पहुंची हैं। तो हम देखते हैं कि1:03:19सांथाल्स ने भी यहां पर आवाज उठाई।1:03:21उन्होंने भी अंग्रेजों के खिलाफ आवाज1:03:23उठाई। फाइट वगैरह करी। बट हम देखते हैं कि1:03:25काफी सारे लोगों को यहां पर मारा गया।1:03:27सिद्धू कानू को अरेस्ट कर लिया गया। बहुत1:03:29सारी चीजें हमें यहां पर होती हुई देखने1:03:31को मिली। अंग्रेजों ने पूरी तरीके से जो1:03:34संथाल्स के गांव के गांव थे उनमें आग लगा1:03:36दी। तो कुल मिलाकर के हम क्या देखते हैं1:03:38कि फोर्सफुल यहां पर जो है कोशिश करी गई1:03:41इनको रोकने की। अलग-अलग एरियाज के अंदर जो1:03:44हमारे किसान थे उन्होंने भी आवाज उठाई1:03:46अंग्रेजों के जो अनफेयर ब्रिटिश रेवेन्यू1:03:48सिस्टम था उसके खिलाफ मनी लेंडर्स के1:03:50खिलाफ लैंड लॉर्ड्स के खिलाफ यहां पर आवाज1:03:52उठाई गई। जिसमें हमें 1859 1862 के अंदर1:03:55बचा जी इंडिगो रिवोल्ट देखने को मिलता है।1:03:58इंडिगो रिवोल्ट यहां पर क्यों हुआ कि1:04:00अंग्रेजों ने भारत के किसानों को कहा कि1:04:03भैया आप इंडिगो क्रॉप को ग्रो करो। आप1:04:06इंडिगो की फसल लगाओ। अब इंडिगो का मतलब1:04:08क्या है? नील की खेती। क्या आप लोगों ने1:04:10घर में देखा है? मम्मा जो है नील का1:04:13इस्तेमाल करती हैं खासतौर पर वाइट कपड़ों1:04:15के अंदर। तो ये जो नील था बच्चा एक तरीके1:04:18से डाई था। केमिकल था। ये क्या करता था?1:04:20ये किसानों की जो लैंड होती थी उसको खराब1:04:23कर देता था। बिकॉज़ केमिकल लगाने से लैंड1:04:25ऑटोमेटिकली खराब होगी। किसान चाहते थे कि1:04:28हम कोई फूड क्रॉप लगाएं। हम भैया राइस1:04:30लगाएं, वीट लगाएं जिससे हमारा फायदा हो।1:04:32बट अंग्रेजों ने क्या कहा कि आप इंडिगो1:04:34लगाओ। जबरदस्ती यहां पर किसानों से इंडिगो1:04:36लगाया गया। उन्हें प्रॉपर पेमेंट नहीं करा1:04:38जाता था। उन्हें कर्जों में डाल दिया जाता1:04:40था। उनको टॉर्चर करा जाता था। कोई किसान1:04:43अगर आवाज उठाता था उसे जेल में डाला जाता1:04:45था। तो इस इंडिगो के प्लांटेशन सिस्टम के1:04:48खिलाफ भी हमें 1859 1862 में रिवोल्ट होता1:04:51हुआ देखने को मिला। और आगे चलकर के आप1:04:53पढ़ोगे कि कैसे इस इंडिगो प्लांटेशन1:04:56सिस्टम के खिलाफ चंपारण के अंदर महात्मा1:04:58गांधी ने 1917 में सत्याग्रह भी करा। तो1:05:01ये सारी चैलेंजेस ये सारी प्रॉब्लम्स1:05:03बच्चा जी हमें होती हुई देखने को मिली। हम1:05:05देखते हैं कि जो1:05:08अपराइजिंग्स यहां पर हुई उन्होंने1:05:10प्लांटर्स को टारगेट वगैरह करा। पीजेंट्स1:05:12के ऊपर अटैक वगैरह करे। यहां पर काफी सारे1:05:14एजुकेटेड बंगालीज का सपोर्ट भी हमें यहां1:05:17पर देखने को मिला। बट अनफॉर्चूनेटली हम1:05:19क्या देखते हैं? अनफॉर्चूनेटली हम देखते1:05:21हैं कि इस रेबेलियन को दबा दिया गया। अब1:05:23एक ऐसा रेबेलियन, एक ऐसा आंदोलन अंग्रेजों1:05:27के खिलाफ हुआ जिसने अंग्रेजों को पूरी1:05:29तरीके से हिला करके रख दिया। वो था द1:05:32रिवोल्ट ऑफ 1857 जिसके बारे में अब हम1:05:36यहां पर बात करेंगे। ये रिवोल्ट ऑफ 18571:05:39बहुत इंपॉर्टेंट है। यहां से आपके एग्जाम1:05:41में 100% क्वेश्चन आएगा ही आएगा। देखिए जब1:05:43हम बात करते हैं रिवोल्ट ऑफ 1857 की।1:05:46अंग्रेज अपनी शान को दिखाने के लिए, अपने1:05:49आप को बचाने के लिए इसको सिपोटिनी कह देते1:05:51हैं। कह देते हैं अंग्रेज हिस्टोरियंस कि1:05:53भैया ये तो सिर्फ कुछ सिपाहियों का1:05:55विद्रोह था। बट नहीं ये रिबेलियन ये1:05:58विद्रोह एक ऐसा रिवोल्ट था जिसने अंग्रेजी1:06:01हुकूमत को हिला करके रख दिया। अंग्रेजों1:06:04को यह लगा था कि बस भैया भारत हमारे हाथ1:06:06से गया ही। यह बात सच है कि शुरुआत जो है1:06:09सिपॉय से ही हुई थी। बट आगे चलकर के हम1:06:11सिपॉय का मतलब क्या है? जो ब्रिटिश आर्मी1:06:14के अंदर सिपाही थे, सोल्जर्स थे वो यहां1:06:16पर तो सिपाहियों से ही हुई थी क्योंकि था1:06:19क्या आप समझो कि ब्रिटिश आर्मी के अंदर जो1:06:21ज्यादातर सिपाही थे वो कौन थे? वो ऐसे लोग1:06:24थे जो गांव से आते थे जिनके परिवार खेती1:06:27करते थे। तो अंग्रेजों की जो लैंड1:06:29रेवेन्यू पॉलिसीज थी उससे किसान बड़ा1:06:32परेशान था। उसे सिपाही बड़ा परेशान था कि1:06:35यार मैं तो यहां पर अंग्रेजों की फौज में1:06:37नौकरी कर रहा हूं। वहां पर अंग्रेज मेरे1:06:39दादा को, मेरे पापा को, मेरे भाई को, मेरी1:06:42मम्मी को मार रहे हैं, पीट रहे हैं।1:06:44रेवेन्यू के लिए वो परेशान है। तो यहां पर1:06:46हमारा सिपाही वैसे ही बहुत ज्यादा परेशान1:06:48था। आगे चलकर के हम क्या देखते हैं कि1:06:50वेलौर के अंदर भी सिपाहियों ने 1806 में1:06:53तमिलनाडु में आवाज उठाई थी। क्यों? यहां1:06:55पर अंग्रेज क्या करते हैं? अंग्रेज एक ऐसा1:06:57कानून लेकर के आते हैं जो कहता है कि जो1:07:00हिंदूज हैं वो तिलक नहीं लगा सकते और जो1:07:03मुस्लिम्स हैं वो बियर्ड नहीं रख सकते।1:07:05मतलब ये ऐसा कानून था जो यूनिफार्म एक्ट1:07:08के थ्रू लाया गया था कि भैया कोई भी अगर1:07:10ब्रिटिश इंडियन आर्मी में आएगा कोई भी अगर1:07:12ब्रिटिशर्स की आर्मी को ज्वाइन करेगा तो1:07:14उसको तिलक नहीं लगाना होगा उसको दाढ़ी1:07:16नहीं रखनी होगी तो हिंदूज और मुस्लिम्स को1:07:18ये अपने रिलीजन के खिलाफ अपने फेथ के1:07:20खिलाफ लगा तो तमिलनाडु में इसके खिलाफ1:07:23वेल्लोर में आवाज उठाई गई बट यहां पर1:07:26अंग्रेजों ने इस म्यूटिनी को पूरी तरीके1:07:28से दबा दिया काफी सारे जो यहां पर सिपाही1:07:32थे जिन्होंने वेलौर फोर्ट के ऊपर कब्जा1:07:34करा था उन्हें अरेस्ट कर लिया गया, मार1:07:36दिया गया। कई 100 सिपाहियों को यहां पर1:07:38मारा गया। बट आगे चलकर के क्या होता है कि1:07:41अंग्रेज 1857 में क्या करते हैं? नई तरीके1:07:44की गन लेकर के आते हैं। राइफल लेकर के आते1:07:47हैं। और माना जाता था कि उन राइफल्स के1:07:49अंदर जो कार्टेजेस डलती थी यानी कि जो1:07:51गोलियों का इस्तेमाल होता था बच्चा वो1:07:53गोलियां कैसी थी? वो गोलियां जो थी जो1:07:55कार्टेजेस थी वो बनी हुई थी काऊ और पिग के1:07:59फैट से। यानी कि पहले जो राइफल चलती थी1:08:02उसमें क्या होता था बच्चा जी? कार्टेजेस1:08:03आते थे। कार्टेजेस के अंदर बारूद होता था।1:08:06ठीक है? बुलेट होती थी। उसको सिपाहियों को1:08:09अपने मुंह से ऐसे छीलना होता था। का1:08:11कार्टेज को जो है बंदूक के अंदर डालना1:08:13होता था और फिर फायर करना होता था। यानी1:08:16कि मुंह से काट करके मुंह से छील करके1:08:18करना होता था। तो माना गया कि जो कार्टेज1:08:20है उसका जो ऊपर का टॉप है वो काऊ के फैट1:08:23से और पिग के फैट से बना है। और आप सब लोग1:08:25जानते हो कि हिंदूस के लिए काऊ माता है।1:08:28है ना? और अगर काऊ फैट को कोई हिंदू खाएगा1:08:31तो भैया उसका धर्म भ्रष्ट होगा। उसके धर्म1:08:33के लिए गलत चीज है। इसी तरीके से पिग का1:08:35फैट जो है वो इस्लाम में मुस्लिम्स के लिए1:08:37गलत है। तो हम यहां पर क्या देखते हैं? हम1:08:39यहां पर ये देखते हैं कि जैसे ही ये रमर्स1:08:41फैली तो जो भी हिंदूज और मुस्लिम्स थे1:08:44उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई। हम देखते1:08:46हैं कि पहली बार वेस्ट बंगाल के बारकपुर1:08:49के अंदर जो मंगल पांडे थे उन्होंने इसके1:08:51खिलाफ यहां पर आवाज उठाई। ब्रिटिश ऑफिसर्स1:08:54के खिलाफ उन्होंने एक तरीके से अटैक करा।1:08:56बट मंगल पांडे को यहां पर अरेस्ट कर लिया1:08:58गया और उनको यहां पर फांसी की सजा दे दी1:09:01गई। इसके बाद हम क्या देखते हैं कि उत्तर1:09:03प्रदेश के अंदर सिपाहियों ने आवाज उठाई।1:09:05उन्होंने ब्रिटिश ऑफिसर्स को मारना शुरू1:09:08कर दिया। 10थ मार्च के आसपास की बात हमें1:09:11ये देखने को मिलती है। हम देखते हैं कि1:09:13काफी सारे सिपाही मेरठ से दिल्ली की तरफ1:09:16मार्च करते हैं और दिल्ली में जो उस टाइम1:09:18पर मुगल बादशाह हुआ करता था जो अंग्रेजों1:09:21की ही पेंशन पर चल रहा था बहादुर शाह जफर1:09:23उसके पास जाते हैं और उसे कहते हैं कि भाई1:09:25देख तू ऐसे ही कुछ नहीं कर रहा। तू हमारा1:09:27लीडर ही बन जा। तुझे कम से कम इतिहास इसी1:09:30मामले में याद कर लेगा। तो बहादुर शाह जफर1:09:33को अपना लीडर बनाते हैं और देखते हैं कि1:09:34ये जो रिवोल्ट था ये धीरे-धीरे देखतेदेखते1:09:37बाकी के जो राजा महाराजा प्रिंसी स्टेट्स1:09:40थे जो अंग्रेजों से परेशान थे वो भी इसके1:09:42अंदर पार्टिसिपेट करते हैं। तो हम देखते1:09:44हैं बच्चा जी कानपुर, लखनऊ, झांसी इन सब1:09:47एरियाज के अंदर रिवोल्ट धीरे-धीरे फैलने1:09:49लगता है। क्योंकि इन सब की अपनी-अपनी1:09:51प्रॉब्लम्स थी। जैसे कानपुर की बात करें1:09:53तो नाना साहेब की यहां पर प्रॉब्लम थी कि1:09:55भैया नाना साहेब को मराठास के सक्सेसर के1:09:58तौर पर नहीं माना जा रहा था। तो नाना साहब1:10:00यहां पर आवाज उठाते हैं। नाना साहेब यहां1:10:02पर रेबेल करते हैं। बट आगे चलकर के हम1:10:04देखते हैं कि उनको भी एक तरीके से यहां पर1:10:07उनके विद्रोह को दबा दिया जाता है। देन1:10:09सिमिलरली हम यहां पर बात करते हैं1:10:11ब्रिटिशर्स की। तो ब्रिटिशर्स ने 1857 में1:10:14दिल्ली को दोबारा से अपने कंट्रोल के अंदर1:10:16ले लिया। हम देखते हैं कि कानपुर वाले1:10:18हिस्से के अंदर भी बहुत बड़े लेवल पर1:10:20लोगों को मारा गया। जिन लोगों ने नाना1:10:21साहेब और उनके लोगों की मदद करी थी उनको1:10:24चौराहों के ऊपर लाकर के मारा गया। डराने1:10:26की लोगों को कोशिश करी गई और काउंटलेस1:10:28डेथ्स हमें यहां पर होती हुई देखने को1:10:30मिली। यानी कि इस रिवोल्ट के अंदर1:10:32अंग्रेजों ने पूरी तरीके से कत्लेआम यहां1:10:35पर करा आम जनता को डराने के लिए। हम देखते1:10:38हैं कि काफी सारे हिस्टोरियंस का ऐसा1:10:40मानना है कि ये रिवोल्ट ऑफ 1857 फेल इसलिए1:10:43हो गया। इंडियंस इस रिवोल्ट के अंदर1:10:45सक्सेसफुल इसलिए नहीं हो पाए क्योंकि यहां1:10:47पर कोई यूनिटी नहीं थी। यहां पर सब1:10:50अपने-अपने हिसाब से चल रहे थे। झांसी के1:10:52अंदर रानी झांसी लक्ष्मीबाई अपने आप लड़1:10:54रही थी। अवध के अंदर बेगम हजरत महल अपने1:10:57तरीके से लड़ रही थी। कानपुर में नाना1:10:59साहिब अपने तरीके से लड़ रहे थे। बिहार के1:11:02अंदर कुंवर सिंह अपनी तरीके से लड़ रहे।1:11:03हर बंदा अपने-अपने तरीके से लड़ रहा था।1:11:05कोई यूनिफाइड स्ट्रेटजी नहीं थी। और1:11:08अंग्रेजों के पास जो है ऑब्वियसली काफी1:11:10ज्यादा बेहतर इक्विपमेंट्स वगैरह भी थे।1:11:12और हम देखते हैं कि जैसे ही ये रिवोल्ट1:11:15खत्म होता है उसके बाद अंग्रेजों को ये1:11:18चीज समझ आ गई। ब्रिटिश क्राउन को यह चीज1:11:20समझ आ गई कि भैया इंग्लिश ईस्ट इंडिया1:11:22कंपनी के बस का नहीं है। तो 1857 के बाद1:11:25जैसे ही रिवोल्ट खत्म हुआ 1858 में हम1:11:28क्या देखते हैं बच्चा? 1858 के अंदर हम1:11:31लोग ये देखते हैं कि अंग्रेज जो है1:11:33ब्रिटिश क्राउन जो है ब्रिटिश में जो1:11:35पार्लियामेंट है वो इंग्लिश ईस्ट इंडिया1:11:37कंपनी से भारत के एडमिनिस्ट्रेशन को छीन1:11:40लेता है। और अब 1858 में भारत डायरेक्ट1:11:44ब्रिटिश क्राउन के अंडर आ गया। यानी कि अब1:11:46ब्रिटेन की पार्लियामेंट में मिनिस्टर1:11:48होगा जो भारत को डील करेगा। भारत के1:11:51मामलों को डील करेगा। पहले क्या था?1:11:53इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी यहां पर1:11:55एडमिनिस्ट्रेशन संभाल रही थी जो व्यापार1:11:57करने आई थी। बट अब जब यहां पर 1857 का1:11:59रिवोल्ट हुआ तो अंग्रेज कहने लगे कि भैया1:12:02ये कंपनी तो पागल है। अभी हमारे हाथ से1:12:04सोना चक्की चिड़िया चली जाती। अभी हम हम1:12:06बर्बाद हो जाते पूरी तरीके से तो ब्रिटिश1:12:08क्राउन यानी कि ब्रिटिश जो पार्लियामेंट1:12:11थी जो ब्रिटेन का राजा महाराजा था वो1:12:13समझता है कि हां भाई अब हमें चीजें अपने1:12:15हाथ में लेनी है। तो 1858 में ये सारी1:12:17चीजें होती हैं। इंडियन आर्मी को1:12:18रिऑर्गेनाइज करा जाता है। यहां पर1:12:20अंग्रेजों का नंबर बढ़ाया जाता है।1:12:23इंडियंस का नंबर कम करा जाता है ताकि1:12:25फ्यूचर में कोई प्रॉब्लम ना हो। जो लोग1:12:28अंग्रेजों के सपोर्ट में थे उनको ज्यादा1:12:30आर्मी के अंदर डाला जाता है। ये सारी1:12:32चीजें हमें होती हुई देखने को मिलती हैं।1:12:34बट इस 1857 रिवोल्ट की दो मेन नायिका या1:12:38दो मेन हीरोइंस हमें देखने को मिलती हैं।1:12:40जिसमें सबसे पहले है रानी लक्ष्मीबाई ऑफ1:12:42झांसी। माना जाता है कि रानी लक्ष्मीबाई1:12:46की जब हम बात करते हैं तो अपने किंगडम1:12:48झांसी को बचाने के लिए उन्होंने बहुत ही1:12:50बहादुरी से लड़ाई लड़ी और आप सब ने सुना1:12:52भी होगा। खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी1:12:55वाली रानी थी। मर्दानी का टाइटल इनको दिया1:12:57गया। हम देखते हैं कि जब आगे चलकर के1:13:00ग्वालियर का फोर्ट यहां पर कैप्चर कर लिया1:13:02गया तो 185 1858 18th जून को उनकी डेथ1:13:06यहां पर हो जाती है। नाना साहेब के जो1:13:08मिलिट्री एडवाइजर थे तात्या टोपे वो भी1:13:10इनकी हेल्प करते हैं। बट रानी की डेथ के1:13:13बाद तात्या टोपे निकल जाते हैं। बट उनको1:13:15भी कोई ना कोई क्या है? धोखा दे देता है1:13:18अपना और तात्या टोपे भी आगे चलकर के1:13:19अरेस्ट हो जाते हैं। हम देखते हैं कि1:13:21ब्रिटिश ऑफिसर्स खुद ब्रिटिश ऑफिसर्स ने1:13:24कहा कि भैया जो रानी झांसी थी लक्ष्मीबाई1:13:27जो थी वो ब्रेवेस्ट थी ऑल रेबल्स में।1:13:29यानी कि जितने भी लोग 1857 के रिवोल्ट में1:13:32पार्टिसिपेट कर रहे थे उनमें सबसे ज्यादा1:13:34शूरवीर बहादुर रानी झांसी ही थी।1:13:36लक्ष्मीबाई ही थी। आप मुझे कमेंट्स के1:13:38अंदर बताओ। अभी मैंने आपको पीछे बताया था1:13:40कि रानी झांसी ने लक्ष्मीबाई जी ने किस1:13:43पॉलिसी के अगेंस्ट यहां पर आवाज उठाई1:13:45कमेंट्स के अंदर मुझे बताइए। देन उसके बाद1:13:48हम बात करते हैं बेगम हजरत महल की जो अवध1:13:50से मूवमेंट को लीड कर रही थी। बच्चा हम1:13:52देखते हैं कि बेगम हजरत महल जो है यहां पर1:13:551857 के रिवोल्ट को अवध से लीड कर रही थी।1:13:58हम देखते हैं कि यहां पर इनको अंग्रेजों1:14:00ने बोला कि भैया आप सरेंडर कर दो। आपको1:14:02दोबारा से हम जो है क्या कर देंगे? आराम1:14:04से आपको चीजें दे देंगे। बट इन्होंने1:14:06सरेंडर करने से मना कर दिया। यह नेपाल चली1:14:09गई। और जब रिवोल्ट खत्म हुआ उसके बाद जब1:14:11क्वीन विक्टोरिया ने भारत के लोगों के नाम1:14:14एक चिट्ठी लिखी कि भैया हम आपको बहुत1:14:16सम्मान से रखेंगे ये रखेंगे तो दूसरी तरफ1:14:18बेगम हजरत महल ने भी लिखा कि भैया1:14:20अंग्रेजों की बात पर विश्वास मत करना ये1:14:23बहुत गद्दार है। तो ये दो महिलाएं जो थी1:14:25रानी लक्ष्मीबाई और बेगम हजरत महल1:14:28इन्होंने बहुत इंपॉर्टेंट रोल यहां पर1:14:30प्ले करा और इतिहास इन्हें हमेशा सम्मान1:14:32की नजर से ही देखता है आज भी। अब देखिए जब1:14:35बात आती है अंग्रेजों की तो कहा जाता है1:14:38कि भैया अंग्रेजों ने यूरोपियंस ने जो1:14:40भारत में रूल करा उसकी क्या लेगेसी है। तो1:14:42देखो आपने पूरा चैप्टर मेरे साथ पढ़ा ही1:14:44आपने देखा ही कि किस तरीके से भारत को1:14:47बर्बाद करने का काम करा गया। बट अंग्रेज1:14:49क्या कहते हैं कि भैया हम तो भारत को1:14:51सिविलाइज करने के लिए आए थे। हम तो भारत1:14:53को डेवलप करने के लिए आए थे। ये वो लोग1:14:56हैं जो भारत को डेवलप करेंगे। जिनका खुद1:14:59पास्ट जो है काला है। यानी कि अगर आप1:15:02इंडिया की सिविलाइजेशन भारत की1:15:03सिविलाइजेशन को देखें तो हमारी1:15:05सिविलाइजेशन अंग्रेजों से काफी ज्यादा रिच1:15:07काफी ज्यादा पुरानी है। भारत की सभ्यता,1:15:09भारत की संस्कृति, सनातन कल्चर और वहीं पर1:15:12हम क्या देखते हैं कि यूरोप ने यूरोपियंस1:15:14ने आकर के क्या करा? भारत में लूटपाट करी,1:15:16वायलेंस करा। भारत के लोगों को भारत की1:15:19जनता को उन्हीं के देश में आकर के लूटा,1:15:21बर्बाद करा। वहीं कुछ अच्छे काम भी हुए1:15:24भैया। जैसे कि हमारा जो इंडिया था, हमारा1:15:27जो भारत था वो पूरे वर्ल्ड के लिए ओपन हो1:15:29गया। बट इनको नुकसान भी हुआ, हमें लूटा भी1:15:31गया। हम देखते हैं कि अंग्रेजों ने हमारे1:15:34देश के काफी सारे सर्वे करे, मैप करे,1:15:36मैपिंग वगैरह करी, बट अपने फायदे के लिए1:15:38चीजें करी। हम देखते हैं कि अंग्रेजों ने1:15:41काफी सारे मोन्यूमेंट्स के बारे में स्टडी1:15:43करी। हमारे ताजमहल के बारे में, बाकी1:15:45चीजों के बारे में। बट लूटा भी बहुत। अगर1:15:47आप ब्रिटेन के इंग्लैंड के म्यूजियम में1:15:50जाओगे जो लंदन में है। आपको वहां देखने को1:15:52मिलेगा कि भारत से लूटी हुई सारी चीजें1:15:54वहां पड़ी हैं। अभी दो साल पहले की बात1:15:56है। मेरा छोटा भाई लंदन मतलब यूके पढ़ने1:15:59गया हुआ था तो वो लंदन के म्यूजियम में1:16:01विजिट करता है। उसने वहां से मुझे वीडियो1:16:03कॉल करी फोटो वगैरह भेजी। तो वहां पर जो1:16:06हमारे महाराजा रंजीत सिंह है उनका छोटा1:16:08सिंहासन पड़ा हुआ है। महाराजा रंजीत सिंह1:16:10जी जो अपनी पगड़ी के अंदर कलकी लगाते थे1:16:12वो पड़ी है। छत्रपति शिवाजी महाराज के1:16:15ऑर्नामेंट्स पड़े हैं। तलवारें पड़ी हैं।1:16:16तो मेरा भाई कहने लगा कि भाई ये तो मुझे1:16:19ऐसा लग रहा है कि मैं अंग्रेजों के चोर1:16:21बाजार में आ गया। मैंने कहा भाई वो चोर1:16:22बाजार ही है। क्योंकि भारत से लूट-लूट के1:16:25सारी चीजें वहां पर उन्होंने लेके गए वो।1:16:27है ना? और आज बड़े शान से दिखाते हैं कि1:16:29देखो हम यह भारत से लाए थे। बट कौन उन्हें1:16:31बताए कि भैया यह लूट का सामान है। है ना?1:16:34ये लूटा हुआ सामान है और इतिहास उसके बारे1:16:37में जानता है। भले ही तुम कुछ मर्जी कहो1:16:38ये चोरी डकैती का सामान है तुम्हारा जो1:16:40तुमने रखा हुआ है। तो ये सारी चीजें हमें1:16:42यहां पर बच्चा जी देखने को मिलती हैं।1:16:44हालांकि हम देखते हैं कि काफी सारे जो1:16:47हमारे जो इंडियन टेक्स्ट थे संस्कृत1:16:50टेक्स्ट थे जैसे कि हमारे वेद हो गए पुराण1:16:52हो गए उनको इंग्लिश भाषा में फ्रेंच भाषा1:16:54में ट्रांसलेट भी करा गया। बट उसके पीछे1:16:56का मेन मकसद कहीं ना कहीं ये था कि देखा1:16:59जाए कि हिंदूइज़्म के अंदर सनातन कल्चर के1:17:01अंदर भारत के कल्चर के अंदर क्या बातें1:17:03हैं और प्रूव करा जाए कि भैया नहीं1:17:05क्रिश्चियनिटी इससे बेटर है सुपीरियर है।1:17:07तो ये सारी चीजें कहीं ना कहीं हमें देखने1:17:09को मिलती हैं। हालांकि जो भारत से टेक्स्ट1:17:12भारत से जो हमारे इंपॉर्टेंट सोर्सेस थे1:17:17जो अंग्रेज अपने साथ लेकर के गए। इन चीजों1:17:20ने अंग्रेजों की बहुत ज्यादा मदद भी करी1:17:22खुद को और डेवलप करने में। क्योंकि बच्चा1:17:24जी जब हम भारत के कल्चर के भारत के इतिहास1:17:26के बारे में बात करते हैं तो भारत ऐसा देश1:17:29है जिसने वर्ल्ड को सबसे पहले एस्ट्रोलॉजी1:17:33एस्ट्रोनॉमी के बारे में बताया। भारत एक1:17:35ऐसा देश है जहां पर आज से 1500 साल पहले1:17:39ही आयुर्वेद के बारे में बात करी जाती थी।1:17:42भारत एक ऐसा देश है जहां पर आज से 15001:17:45साल पहले ही सर्जरी के बारे में बात करी1:17:48जाती थी। तो इन सब चीजों को अंग्रेज इन सब1:17:50नॉलेज को अंग्रेज भारत से लूट के लेकर के1:17:53गए और अपने डेवलपमेंट के लिए इस्तेमाल भी1:17:55करा। बट अनफॉर्चूनेटली आज भी हम लोग अपने1:17:59कल्चर के अंदर अपने देश के अंदर, अपनी1:18:01भाषा के अंदर गर्व करने से डरते हैं। एंड1:18:04व्हिच आई फील दैट ये बहुत गलत चीज है। तो1:18:07आप सब लोग कमेंट्स के अंदर मुझे जरूर1:18:09बताइएगा कि आपको इस आज का चैप्टर कैसा1:18:11लगा। यह पूरा चैप्टर यहीं पर एंड करते1:18:12हैं। दैट्स ऑल फॉर इट। और सब बच्चे वीडियो1:18:15को लाइक जरूर करिएगा। कमेंट्स में हर एक1:18:17बच्चा भारत माता की जय जरूर लिखना। बिकॉज़1:18:20भारत है तो हम है और हम है तो ये देश है1:18:23और ये देश है तो बस मैं इमोशनल हो जाऊंगा1:18:27आगे। सो चलिए दैट्स ऑल फॉर द डे। थैंक यू1:18:29सो मच एवरीवन। हर एक बच्चा वीडियो को लाइक1:18:31जरूर करेगा। कमेंट्स में अपना फीडबैक जरूर1:18:33देगा। और नीचे डिस्क्रिप्शन में पहले1:18:35पार्ट का लिंक है। पूरी प्लेलिस्ट का लिंक1:18:37है। नोट्स भी आप डाउनलोड कर सकते हो। फ्री1:18:39ऑफ कॉस्ट जाकर के वेबसाइट का लिंक भी1:18:40गिवेन है। पिंड कमेंट के अंदर भी पार्ट वन1:18:42का लिंक है। तो फटाफट से जाकर के उसको भी1:18:44देख लीजिएगा। तो चलिए आज के सेशन को यहीं1:18:46पर एंड करते हैं। दैट्स ऑल फॉर द डे। थैंक1:18:48यू सो मच एवरीवन। आपके गौतम भैया यानी कि1:18:50गौतम लखानी साइनिंग ऑफ। जय हिंद जय भारत।1:18:52लव यू ऑल। अगर किसी का कोई भी डाउट आता है1:18:55तो आप फ्री फ्रीली मुझे जो है Instagram1:18:57के ऊपर भी रीच आउट कर सकते हैं। चलिए1:18:59मिलते हैं अगली क्लास के अंदर। तब तक के1:19:00लिए बाय-ब टाटा। लव यू ऑल। थैंक यू सो मच1:19:02एवरीवन। मोशन है तो भरोसा
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